मेष राशि के लोग स्वभाव से ऊर्जावान, साहसी और आगे बढ़ने वाले माने जाते हैं। वे जोखिम लेने से नहीं डरते और नई शुरुआत करने में विश्वास रखते हैं। लेकिन जब जीवन में शनि का प्रभाव बढ़ता है, तो यही तेज ऊर्जा कई बार बेचैनी, जल्दबाज़ी और आर्थिक दबाव का कारण बन सकती है। वर्ष 2026 मेष राशि के लिए इसलिए खास है क्योंकि इस समय शनि साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होता है, जिसे ज्योतिष में एक परीक्षा का समय माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार साढ़ेसाती का पहला चरण अक्सर अचानक बढ़ते खर्च, आर्थिक दबाव और जिम्मेदारियों में वृद्धि लेकर आता है। इस समय व्यक्ति को लगता है कि मेहनत के बावजूद धन रुक नहीं पा रहा या अनावश्यक खर्च बढ़ रहे हैं। साथ ही मानसिक तनाव और भविष्य की चिंता भी बढ़ सकती है। शनि का यह गोचर व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और सही योजना बनाना सिखाता है, लेकिन इसकी गर्म ऊर्जा को शांत करना भी जरूरी माना जाता है।
ऐसे समय में शनि देव की आराधना को विशेष लाभकारी माना गया है। शनि दोष शांति पूजा का उद्देश्य शनि के तीव्र प्रभाव को शांत करना और जीवन में संतुलन लाना है। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई शनि पूजा मानसिक दबाव को कम करने, अनियंत्रित खर्च पर नियंत्रण लाने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में सहायक होती है। यह पूजा व्यक्ति को धैर्य, स्थिरता और जिम्मेदारियों को संभालने की शक्ति देती है।
इसी उद्देश्य से उज्जैन के पावन नवग्रह शनि मंदिर में यह विशेष शनि दोष शांति पूजा आयोजित की जा रही है। यह मंदिर शनि देव की आराधना के लिए एक प्रसिद्ध स्थान माना जाता है, जहां भक्त आर्थिक नुकसान से राहत, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता के लिए प्रार्थना करते हैं। साढ़ेसाती के इस चरण में नियमित पूजा और संयमित जीवनशैली मेष राशि के लोगों के लिए एक मजबूत सहारा बन सकती है।
श्रद्धालु श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लेकर शनि देव से प्रार्थना कर सकते हैं कि वे साढ़ेसाती के इस समय को सीख, संतुलन और स्थिरता का अवसर बनाएं। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई आराधना जीवन में शांति, नियंत्रण और नई दिशा देने वाली मानी जाती है।