मेष राशि के जातक साहसी, ऊर्जावान और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं। वे नए कार्यों में आगे बढ़ने और चुनौतियों का सामना करने से नहीं डरते। हालांकि, कभी-कभी उनकी जल्दबाजी और अधीरता उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेने से रोक सकती है। यही कारण है कि चुनौतीपूर्ण ग्रह दशाओं में तनाव और असंतुलन का अनुभव हो सकता है।
ज्योतिषियों के अनुसार, वर्ष 2026 मेष राशि के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह शनि साढ़ेसाती का पहला चरण जारी रहने का समय है। शनि साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 से शुरू हुआ और 3 जून 2027 तक चलेगा। इस दौरान शनि अपने अनुशासन और कर्मों की परीक्षा के प्रभाव के साथ जातकों के जीवन में संतुलन और स्थिरता लाने की प्रक्रिया करता है। यह समय परिपक्वता और आत्मबोध देने वाला माना जाता है, लेकिन साथ ही मानसिक दबाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव और कार्यभार के कारण थकान भी महसूस हो सकती है।
इस अवधि में मेष राशि के जातकों को तीन मुख्य बातों का ध्यान रखना लाभकारी होता है:
उग्र स्वभाव और जल्दबाजी पर नियंत्रण: सोच-समझकर निर्णय लें और जल्दबाज़ी में फैसलों से बचें। यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
आर्थिक स्थिरता पर ध्यान: आय के अवसर होने के बावजूद अनियंत्रित खर्च और अस्थिरता चिंता का कारण बन सकती है। बचत और खर्च का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
मानसिक थकान से बचाव: जिम्मेदारियों और काम के बोझ के कारण मन और शरीर पर दबाव बढ़ सकता है। ध्यान और आराम के लिए समय निकालना फायदेमंद रहेगा।
शनि दोष शांति पूजा शनि साढ़ेसाती के प्रभाव को संतुलित करने में लाभकारी मानी जाती है। यह पूजा अनुशासन, मानसिक दृढ़ता और जीवन में स्थिरता लाने में मदद करती है। इसीलिए उज्जैन स्थित पावन नवग्रह शनि मंदिर में यह पूजा आयोजित की जा रही है। यहाँ श्रद्धालु आर्थिक हानि से राहत पाने, मानसिक तनाव कम करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रार्थना करते हैं।
साढ़ेसाती के इस चरण में संयम, समझदारी और नियमित पूजा-भक्ति से मेष राशि के जातक अपनी मानसिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो यह समय अपने कर्मों पर ध्यान देने, धैर्य बनाए रखने और जीवन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
श्रद्धालु इस विशेष पूजा में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लेकर अपने जीवन में संतुलन, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।