🔱 सावन का आखिरी सोमवार और एकादशी: 1 लाख 8 ‘ॐ नमः शिवाय’ जाप और 1008 बेल पत्र, तुलसी सहस्र अर्चना 🕉️
🙏 शांति और कल्याण की इस साधना से जुड़ने का आखिरी अवसर न गंवाएं!
सावन महीने का आखिरी सोमवार इस साल एकादशी के शुभ संयोग के साथ आ रहा है, जो शिव और विष्णु जी दोनों की कृपा प्राप्ति का विशेष अवसर माना जाता है। सनातन परंपरा में सावन को भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम समय कहा गया है और सोमवार के दिन की गई साधना विशेष फलदायी मानी जाती है। जब यही सोमवार एकादशी से जुड़ता है, तो यह तिथि शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए और भी फलदायी बन जाती है। इसी दुर्लभ संयोग पर, श्री मंदिर द्वारा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में एक विशिष्ट पूजा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पंचाक्षरी जाप, बेल पत्र अर्चना के साथ तुलसी सहस्र नाम भी शामिल हैं।
🕉️ तुलसी सहस्र अर्चना की महिमा:
तुलसी सहस्र नाम एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें भगवान विष्णु की पत्नी तुलसी देवी के एक हजार नामों का वर्णन किया गया है। तुलसी देवी को हिंदू धर्म में पवित्र और पूजनीय माना गया है, और उनके सहस्र नाम का पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ होता है। मान्यता है कि जब यह साधना एकादशी और सावन की शक्ति से जुड़ती है तो इसका फल कई पूजाओं के बराबर हो जाता है।
🕉️ 1008 बेल पत्र अर्चना:
1008 बेल पत्र अर्चना महादेव को प्रसन्न करने की बेहद प्रचलित विधि है, जिसमें भगवान शिव की पूजा के लिए 1008 बेल पत्र चढ़ाए जाते हैं। बेल पत्र भगवान शिव की पूजा में बहुत महत्व रखता है, और इसकी अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा जल्द से जल्द प्राप्त हो सकती है। इस आराधना के फल से भक्तों को परिवार में शांति, कल्याण और समृद्धि की सही दिशा मिलती है। सावन का आखिरी सोमवार, इस अनुष्ठान में भाग लेने का आखिरी अवसर है।
🙏 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां राजा मंदाता ने पाया था रोग और मृत्यु से मुक्ति का वरदान
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा तट पर स्थित वह पवित्र स्थान है, जहाँ मां नर्मदा ॐ के आकार में बहती हैं, और शिव का स्वरूप ध्वनि और ऊर्जा के रूप में प्रतिष्ठित है। यह स्थल केवल एक ज्योतिर्लिंग नहीं, बल्कि मंत्रशक्ति और आध्यात्मिक उपचार का केन्द्र भी माना जाता है। मान्यता है कि इक्ष्वाकु वंश के राजा मंदाता ने यहीं कठोर तप कर अपने वंश को रोग और असमय मृत्यु से मुक्ति दिलाई थी। इसीलिए यह स्थल 1 लाख 8 ॐ नमः शिवाय जाप जैसे फलदायी मंत्रों, बेल पत्र और तुलसी सहस्र नाम अर्चना जैसे अनुष्ठानों के लिए बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस महानुष्ठान में सहभागी बनें और सावन के आखिरी सोमवार-एकादशी को शिव और विष्णु जी की संयुक्त कृपा का अनुभव करें।