🪐 सनातन परंपरा में शनि देव को कर्मों से जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जीवन में आने वाली परिस्थितियाँ हमारे कर्मों और धैर्य की परीक्षा लेती हैं। जब शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या का समय चलता है, तो कई लोगों को जीवन में देरी, बार-बार रुकावटें, मन पर दबाव और अस्थिरता महसूस हो सकती है। इसका असर केवल कामकाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्वास्थ्य, नींद, आर्थिक सोच और पारिवारिक माहौल पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति भीतर से थकावट और भविष्य को लेकर असमंजस महसूस करने लगता है।
🪐 शनि से जुड़ी यह स्थिति व्यक्ति के साथ-साथ पूरे घर के वातावरण को प्रभावित कर सकती है। इसी भाव के साथ श्री मंदिर जनवरी में 2 शनिवारों का विशेष शनि महापूजा चक्र आयोजित कर रहा है, ताकि साधक शनि से जुड़े विषयों को समझते हुए संयम और आत्मचिंतन के भाव से साधना कर सकें। लगातार दो शनिवारों की उपासना को शनि ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाने और अपने कर्मपथ पर जागरूकता बढ़ाने का एक पारंपरिक तरीका माना गया है। इस पूजा में परिवार के साथ संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण भाव के रूप में देखा जाता है।
🪐 यह 2 शनिवार शनि शांति अनुष्ठान (24 और 31 जनवरी 2026) को संपन्न होगा।
- पहले शनिवार को साधना स्वास्थ्य और कार्य से जुड़ी स्थिति को समझने के भाव से की जाएगी।
- दूसरे शनिवार को पूजा आर्थिक सोच और पारिवारिक संतुलन पर केंद्रित रहेगी।
इन दोनों दिनों में तिल तेल अभिषेक, काले तिल और शनि मंत्र जप किया जाएगा। शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है और लगातार शनिवारों की साधना को शनि से जुड़े अनुभवों को शांत भाव से स्वीकार करने का माध्यम माना गया है। यह अनुष्ठान उज्जैन स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में किया जाएगा, जहाँ शनि देव की उपासना शिव स्वरूप में होती है। यह स्थान शनि साधना से जुड़ी परंपराओं के लिए जाना जाता है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से 2 शनिवार शनि महापूजा में सहभागी बनकर आप शनि से जुड़े समय को समझने, धैर्य और अनुशासन के भाव को मजबूत करने तथा 2026 में संतुलन और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ने की भावना विकसित कर सकते हैं।