🪔संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का क्या है महत्व? 🙏
सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश को समर्पित पवित्र त्योहार माना जाता है। इस विशेष दिन को, संकटहर चतुर्थी भी कहा जाता है। मान्यता है कि यदि संकष्टी चतुर्थी के दिन ऋण नाशक गणेश स्तोत्र का पाठ और 1008 गणेश दूर्वा अर्चना की जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इससे न केवल कर्ज मुक्ति जैसी समस्याओं से राहत मिलती है, बल्कि धन प्राप्ति, सफलता और समृद्धि के द्वार भी खुलते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ऋण नाशक गणेश स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है, जिसे कर्ज और वित्तीय संकटों को दूर करने के लिए अत्यधिक प्रभावी माना जाता है। यह स्तोत्र मन की शांति और संतुलन प्रदान करता है, साथ ही समृद्धि और खुशहाली को आकर्षित करता है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, सुखकर्ता और दुखहर्ता के अलावा 1008 नामों से पूजा जाता है। एक पौराणिक कथानुसार प्राचीन काल में अनलासुर नामक दैत्य मुनियों और मनुष्यों को निगल जाता था, जिससे स्वर्ग और पृथ्वी पर हाहाकार मच गया। सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की और भगवान शिव ने कहा कि केवल गणेश जी ही इस दैत्य का नाश कर सकते हैं। गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया, लेकिन उनके पेट में जलन होने लगी। तभी कश्यप ऋषि ने 21 गांठों वाली दूर्वा घास गणेश जी को खाने के लिए दी जिसके बाद गणेश जी की जलन शांत हो गई। इसी घटना के बाद से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। इसलिए संकष्टी चतुर्थी के शुभ दिन पर भगवान गणेश के 1008 नामों का जाप करना और हर नाम के साथ दूर्वा चढ़ाना विशेष रूप से शुभकारी हो सकता है। वहीं इसके साथ ऋण नाशक गणेश स्तोत्र पाठ करने से सभी आर्थिक बाधाओं का नाश हो सकता है। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी को काशी के चिंतामणि गणेश मंदिर में इस विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। श्री मंदिर के माध्यम इसमें भाग लें और भगवान गणेश की कृपा से कर्ज मुक्ति एवं धन-संपत्ति की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करें।