08 मार्च का दिन एक अत्यंत प्रभावशाली दिव्य संयोग लेकर आ रहा है। यह दिन रविवार का है, जो सूर्य देव को समर्पित माना जाता है, और इसी दिन स्वाति नक्षत्र का योग बन रहा है जिसे ज्योतिष में राहु का नक्षत्र कहा गया है। जब सूर्य का दिन और राहु का नक्षत्र एक साथ आते हैं, तब यह समय राहु शांति और सूर्य ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। ऐसी स्थिति में किया गया मंत्र जाप जीवन में रुकी हुई गति को फिर से चलाने, भ्रम को दूर करने और सही दिशा देने का माध्यम माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु व्यक्ति के जीवन में अचानक आने वाली रुकावटों, करियर में अस्थिरता, बार-बार असफलता, नाम और पहचान न मिलना तथा मानसिक भ्रम का कारण बन सकता है। वहीं सूर्य देव आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, मान-सम्मान, सरकारी कार्यों में सफलता और जीवन में स्पष्ट दिशा के कारक माने जाते हैं। जब राहु अशांत होता है तो सूर्य के शुभ फल भी पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पाते। इसलिए राहु को शांत कर सूर्य ऊर्जा को जागृत करना जीवन में उन्नति का महत्वपूर्ण मार्ग माना गया है।
इसी दिव्य उद्देश्य से इस विशेष अनुष्ठान में 31,000 मंत्रों का जाप किया जाएगा, जिसमें 21,000 राहु मंत्र और 10,000 सूर्य मंत्र शामिल हैं। मान्यता है कि राहु मंत्र जाप अशुभ प्रभावों को शांत कर जीवन में चल रही रुकावटों को कम करने का माध्यम बनता है, जबकि सूर्य मंत्र जाप आत्मविश्वास, तेज, स्पष्ट सोच और अधिकार की प्राप्ति का भाव जगाता है। जब ये दोनों साधनाएँ एक साथ होती हैं, तब इसे कर्म सुधार, करियर ग्रोथ और जीवन में स्थिर सफलता का शक्तिशाली आध्यात्मिक उपाय माना जाता है।
यह पावन अनुष्ठान उत्तराखंड के प्रसिद्ध राहु पैठाणी मंदिर में संपन्न होगा। यह मंदिर उन चुनिंदा स्थानों में से एक माना जाता है जहाँ राहु देव की विशेष उपासना की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय अमृत ग्रहण करने वाले स्वरभानु का सिर इसी क्षेत्र में गिरा था, जो राहु के रूप में पूजित हुआ। इसलिए यहाँ की गई राहु शांति साधना को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ की गई प्रार्थना राहु से जुड़े दोषों को शांत कर जीवन में नई दिशा देने का माध्यम बनती है।
आज के समय में कई लोग मेहनत करने के बाद भी करियर में पहचान नहीं बना पाते, आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं हो पाती, बार-बार अवसर हाथ से निकल जाते हैं या कार्यों में अनजानी रुकावट आती है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह राहु के अशांत प्रभाव से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसे समय में सूर्य और राहु की संयुक्त साधना जीवन में स्पष्टता, गति और सफलता का मार्ग बनाने की भावना से की जाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य राहु-सूर्य ग्रहण दोष निवारण अनुष्ठान में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप करियर उन्नति, मान-सम्मान, आर्थिक स्थिरता और जीवन में नई पहचान की प्रार्थना कर सकते हैं। यह साधना राहु की अशांति को शांत कर सूर्य के तेज को जागृत करने का एक दुर्लभ और पावन अवसर मानी जाती है।