पौराणिक कथा के अनुसार महादेव की नगरी काशी में स्वयं शिव जी ने बृहस्पति यानि गुरु को स्थान दिया था, इसलिए इनकी क्रुर दृष्टि एवं अशुभत्व से बचने के लिए काशी के श्री बृहस्पति मंदिर में पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सभी नवग्रहों में प्रमुख माने जाने वाले बृहस्पति देव की कृपा से बुद्धि़, भाग्य, धन, आय, शक्ति और करियर में उच्च स्थान की प्राप्ति होती है। वहीं अगर कुंडली में बृहस्पति अशुभ स्थिति में हो तो जातक को जीवन में कई कठिनाइयों जैसे आर्थिक, शैक्षिक, करियर एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए दिनांक 30 मई 2024, गुरुवार के शुभ दिन पर बृहस्पति ग्रह शांति 1008 मूल मंत्र जाप एवं यज्ञ का आयोजन किया गया है।