फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शक्तिशाली और जागृत समय माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण काल में किया गया हर मंत्र जाप, पूजा और यज्ञ सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। शास्त्रों के अनुसार इस समय की गई साधना का प्रभाव तीव्र होता है, क्योंकि ग्रहण के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय रहती है और भक्त की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार होने की भावना से जुड़ी होती है।
जब ग्रहण के आरंभ से लेकर उसके समाप्त होने तक बिना रुके लगातार मंत्र जाप और पूजा की जाती है, तो उसे अखंड जाप कहा जाता है। अखंड का अर्थ है– पूरी अवधि में निरंतर साधना। यह केवल एक पूजा विधि नहीं, बल्कि भक्त के अटूट संकल्प, एकाग्रता और गहरी श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण चंद्र ग्रहण के दौरान किया गया अखंड राहु–चंद्र मंत्र जाप अत्यंत प्रभावशाली और शीघ्र फल देने वाला माना गया है।
चंद्र देव मन, भावनाओं और विचारों के स्वामी माने जाते हैं। जब चंद्र पर राहु का प्रभाव बढ़ता है, तो व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, भ्रम, अनजाना डर, बेचैनी, निर्णय लेने में कठिनाई और बार-बार बदलते विचारों का अनुभव हो सकता है। कई बार बिना कारण चिंता रहना, आत्मविश्वास में कमी आना या मन का एक जगह टिक न पाना भी इसी प्रभाव से जोड़ा जाता है। ऐसे समय में राहु और चंद्र की शांति के लिए किया गया मंत्र जाप और यज्ञ मन को स्थिर करने और सकारात्मक सोच को मजबूत करने की भावना से किया जाता है।
इसी दिव्य ग्रहण काल में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और 10,000 चंद्र मूल मंत्र जाप के साथ राहु–चंद्र दोष शांति यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जब यह संपूर्ण साधना ग्रहण की पूरी अवधि में अखंड रूप से चलती है, तो इसकी आध्यात्मिक शक्ति और भी बढ़ जाती है। यज्ञ की अग्नि में दी गई आहुतियाँ जीवन की नकारात्मकता, मानसिक उलझनों और भावनात्मक असंतुलन को शांत करने की प्रार्थना का प्रतीक होती हैं।
चंद्र देव शीतलता, संतुलन और मानसिक शांति के प्रतीक हैं। उनकी कृपा से मन में स्थिरता और विचारों में स्पष्टता आने की भावना जुड़ी है, जबकि राहु की शांति से भ्रम, डर और अचानक आने वाली मानसिक अशांति से बचाव की प्रार्थना की जाती है। इस प्रकार यह संयुक्त साधना मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता को संतुलित करने का आध्यात्मिक माध्यम मानी जाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष चंद्र ग्रहण काल में होने वाले इस अखंड जाप और यज्ञ में सम्मिलित होकर आप भी अपने नाम से संकल्प जुड़वा सकते हैं। यह दुर्लभ अवसर जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन को जागृत करने की भावना से जुड़ा है, ताकि ग्रहण की जागृत ऊर्जा का पूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सके।