सावन पुत्रदा एकादशी पर 🕉️ शिव की नगरी काशी के मार्कंडेय महादेव मंदिर में 🔥 विशेष हवन से संतान के सुखद भविष्य के लिए करें ईश्वरीय आह्वान 🙏
सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह वह समय होता है जब श्रद्धा, उपवास और जप के माध्यम से मन की शांति, जीवन की दिशा और पारिवारिक कल्याण के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं। इसी महिने की शुक्ल पक्ष तिथि की एकादशी को ‘पुत्रदा एकादशी’ कहा जाता है, जिसका योग विशेष रुप से उन लोगों के लिए शुभ और खास माना जाता है जोकि अपनी संतान के स्वास्थ्य, समझदारी, शिक्षा और जीवन के निर्णयों में संतुलन के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर भगवान शिव से की गई प्रार्थनाएं संतान से जुड़ी उलझनों में स्पष्टता और मानसिक शांति प्राप्त करने में अत्यंत सहायक होती हैं।
इसी दिव्य आशीर्वाद को पाने के लिए सावन पुत्रदा एकादशी पर काशी के मार्कंडेय महादेव मंदिर में एक विशेष पुत्र कामेष्टि हवन किया जा रहा है। यह वही स्थान है जहाँ भगवान शिव ने ऋषि मार्कंडेय को बाल अवस्था में ही मृत्यु से बचाकर अमरता का वरदान दिया था। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में किया गया यज्ञ और हवन, खासकर संतान से जुड़ी मानसिक परेशानियों और भविष्य की चिंताओं को दूर करने में मदद करता है। पुराणों के अनुसार, पुत्र कामेष्टि यज्ञ की शुरुआत भगवान श्रीराम के पिता राजा दशरथ ने की थी। उन्होंने यह यज्ञ अपने वंश को आगे बढ़ाने और संतान के सुखद भविष्य के लिए करवाया था। तभी से यह हवन उन परिवारों के लिए एक विशेष साधना का माध्यम माना जाता है, जो संतान की भलाई और आध्यात्मिक सुरक्षा की कामना रखते हैं। यदि आप भी जीवन में संतान से जुड़ी किसी चिंता या उलझन का सामना कर रहे हैं, तो सावन की यह एकादशी आपके लिए एक शुभ अवसर हो सकती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पुत्र कामेष्टि हवन में सहभागिता कर आप भगवान शिव से अपने संतान के सुखद, सुरक्षित और संतुलित जीवन की प्रार्थना कर सकते हैं।