✨ रुद्रप्रयाग स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर का सनातन धर्म में एक विशेष और दुर्लभ महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार, यही वह पावन स्थान है, जहां भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यह मंदिर दिव्य विवाह की भूमि पर स्थित है और यहां 3 ऐसे पवित्र तत्व हैं, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं — अखंड अग्नि कुंड, जिसे हजारों वर्षों से प्रज्वलित ‘विवाह अग्नि’ माना जाता है; ब्रह्म शिला, जहां विवाह संस्कार संपन्न हुए; और 3 पवित्र कुंड — रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्म कुंड, जिनके जल को विवाह के समय त्रिदेवों द्वारा उत्पन्न माना गया है। मंदिर परंपरा के अनुसार, स्वयं भगवान विष्णु ने यहां कन्यादान किया था, जिससे यह स्थान दिव्य विवाह का एकमात्र धार्मिक साक्ष्य माना जाता है।
🌺 आज के समय में कई लोगों को पूरी कोशिश, पारिवारिक चर्चा और कुंडली मिलान के बावजूद विवाह में बार-बार देरी का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसी देरी विवाह मार्ग की बाधाओं या शिव–शक्ति तत्व के असंतुलन से जुड़ी मानी जाती है।
🌺 जब भक्त समय पर विवाह, संबंधों में स्पष्टता और सही जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना करते हैं, तो वे भगवान शिव और मां पार्वती के पवित्र मिलन की शरण लेते हैं, जो आदर्श दांपत्य और दिव्य संतुलन का प्रतीक है। इसी कारण अनेक अविवाहित भक्त इस पूजा को संकल्प के साथ करते हैं, ताकि विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर हों और भाग्य के अनुरूप जीवनसाथी का मार्ग प्रशस्त हो।
🌺 इस विशेष पूजा में शिव–पार्वती विवाह पूजन, देवी महात्म्य पाठ और अर्धनारीश्वर पूजा की जाती है। विवाह पूजन दांपत्य सामंजस्य के लिए, देवी महात्म्य पाठ भावनात्मक सुरक्षा के लिए और अर्धनारीश्वर पूजा संबंधों में समानता, धैर्य और संतुलन का आह्वान करती है।
श्री मंदिर द्वारा आयोजित इस पूजा में आप भी सहभागी बन सकते हैं और अपने जीवन में बेहतर संवाद, कम मतभेद और नवजीवन से भरपूर साथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।