🌸 त्रिवेणी संगम में माघ मेला सनातन धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र आयोजनों में से एक है और इसे महाकुंभ के बाद सबसे महत्वपूर्ण मेला माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूरा माघ मास अत्यंत पुण्यकारी होता है, इस समय प्रयाग स्नान, दान और तपस्या का विशेष केंद्र बन जाता है। पूरे महीने त्रिवेणी संगम में किया गया स्नान विशेष पुण्य प्रदान करता है और हर स्नान का आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
🌸 बसंत पंचमी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है, जो विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं। यह दिन बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जो जीवन में नई ऊर्जा, उन्नति और समृद्धि लाता है। इस दिन भक्त मां सरस्वती की पूजा, ध्यान और संगम स्नान कर बुद्धि, शिक्षा, कला और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बसंत पंचमी पर त्रिवेणी संगम में किया गया शाही स्नान विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसमें गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की शक्तियां एक साथ मिलती हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं, ज्ञान बढ़ता है और स्वयं तथा पितरों को शांति मिलती है।
🌸 अधूरे पितृ कर्म वर्तमान जीवन में बार-बार संघर्ष, पारिवारिक तनाव और बिना कारण आने वाली बाधाओं के रूप में दिखाई देते हैं। जब पितृ शांत नहीं होते, तो परिवार में असंतुलन बना रहता है। माघ मेला के दौरान पितृ शांति पूजा करना पारंपरिक रूप से इन बाधाओं को शांत करने का उपाय माना गया है। बसंत पंचमी का शाही स्नान पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करने का विशेष अवसर प्रदान करता है।
🌸 त्रिवेणी संगम में मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती का संगम आत्मा को शुद्ध करता है और पितृ ऊर्जा को भी उन्नत करता है। इस विशेष पूजा और आरती में पितृ शांति विधि और श्रद्धा से अर्पण किए जाते हैं। मान्यता है कि माघ मेला के दौरान यहां की गई प्रार्थनाएं पितरों तक पहुंचती हैं, जिससे उन्हें शांति और परिवार को आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🌸 श्री मंदिर के माध्यम से त्रिवेणी संगम में यह पूजा करने से भक्त माघ मास की पवित्र ऊर्जा और बसंत पंचमी की शुभता से जुड़कर अपने पितरों की शांति और परिवार के सुख-समृद्ध भविष्य की कामना करते हैं।