हिंदु धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। यदि सोमवार के दिन अमावस्या पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते है। शास्त्रों में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सोमवती अमावस्या को बहुत शुभ माना गया है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के पूजा के साथ-साथ पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करना भी शुभ माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार अमावस्या के दिन पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं और अपने वंशजो द्वारा किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पितृ दोष निवारण पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। हिंदु धर्म ग्रंथों के अनुसार 'पितृ दोष' पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं और नकारात्मक कर्मों के कारण होता है। इस दोष से पीड़ित जातक के जीवन में आर्थिक परेशानियां, रिश्तों में तनाव एवं विवाद और स्वास्थ्य संबधी समस्याओं का सिलसिला लगा ही रहता है।
यही कारण है कि पुराणों में भी पितृ दोष पूजा के लिए मोक्ष स्थली गया को अत्यधिक प्रभावशाली माना गया है। हिंदू संस्कारों में पंचतीर्थ वेदी में धर्मारण्य वेदी की गणना की जाती है इसलिए यहां पितृ के निमित्त श्राद्ध करने का अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस स्थान पर पितृ दोष निवारण पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वजों द्वारा पारिवारिक विवादों को सुलझाने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के शुभ संयोग पर गया के धर्मारण्य वेदी पर पितृ दोष निवारण पूजा का आयोजन किया जा रहा है। श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में भाग लें और पितृ दोष के अशुभ प्रभावों से राहत पाने के लिए अपने पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।