✨ सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि को देवी शक्ति की गूढ़ और सूक्ष्म शक्तियों की उपासना का विशेष महत्व है। यह दिन भीतर की शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि को जागृत करने के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवी अपने भक्तों पर शांत लेकिन प्रभावशाली रूप से कृपा करती हैं।
✨ जब गुप्त नवरात्रि की पंचमी शुक्रवार के दिन आती है, जो स्वयं देवी लक्ष्मी और शक्ति को अत्यंत प्रिय है, तब इस दिन की गई पूजा का फल और अधिक बढ़ जाता है। शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान होते हैं, जहाँ देवी शक्ति की उपस्थिति सजीव और अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जहाँ-जहाँ माता सती के अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
🛕 ऐसे ही एक महान शक्तिपीठ कालीघाट में, गुप्त नवरात्रि पंचमी के शुभ शुक्रवार को शक्ति-समृद्धि 5 महाविद्या महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कालीघाट 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता सती के दाहिने पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। यहाँ विराजमान माँ काली आदिशक्ति स्वरूप में भय, नकारात्मकता और असंतुलन को दूर कर जीवन में शक्ति और स्थिरता प्रदान करती हैं।
इस महायज्ञ में देवी के पाँच प्रमुख स्वरूपों की उपासना की जाती है:
🌺 माँ काली – भय, अहंकार और नकारात्मकता को दूर करने वाली
🌺 माँ तारा – मार्गदर्शन, बुद्धि और साहस देने वाली
🌺 माँ त्रिपुरा सुंदरी – संतुलन, सौंदर्य और मानसिक सुख प्रदान करने वाली
🌺 माँ भुवनेश्वरी – सृजन, विस्तार और समृद्धि देने वाली
🌺 माँ बगलामुखी – शत्रु बाधाओं को शांत कर विजय दिलाने वाली
✨ मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के शुक्रवार को इन पाँचों महाविद्याओं की पूजा करने से उनकी संयुक्त शक्ति सक्रिय होती है। इन सभी में महालक्ष्मी की समृद्धि शक्ति का अंश माना जाता है, जिससे जीवन में धन, स्थिरता और शुभता का संचार होता है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से इस अनुष्ठान में भाग लेकर भक्त पाँचों महाविद्याओं की संयुक्त कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह पूजा नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करती है, आत्मबल बढ़ाती है और जीवन में स्थायी समृद्धि, शांति और सकारात्मकता लाती है।