🕉️ सनातन में महाशिवरात्रि अत्यंत पावन और आत्म जागरण का पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। यह तिथि शिव-शक्ति के मिलन, आत्मचिंतन और साधना का प्रतीक मानी गई है। मान्यता है कि इस दिव्य काल में रुद्राभिषेक करने से पापों का नाश होता है तथा मन, वाणी और कर्म शुद्ध होते हैं। महाशिवरात्रि पर की गई उपासना भक्त को भय, रोग और नकारात्मकता से मुक्त कर सकती है। यह पर्व वैराग्य, तप और मोक्ष का संदेश देता है और शिव कृपा से जीवन में शांति, शक्ति और संतुलन का संचार बढ़ता है।
शिवरात्रि के पावन अवसर पर 5 शिवालयों में पंच तत्व रुद्राभिषेक का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पंच तत्व—जल, दुग्ध, घृत, मधु और शर्करा—से किया गया अभिषेक सृष्टि के मूल तत्वों का प्रतीक है, जिनसे मानव जीवन और प्रकृति का संतुलन बना रहता है। इस विधि में वैदिक मंत्रों के साथ भगवान शिव का अभिषेक करने से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। मान्यता है कि पंच तत्व रुद्राभिषेक से रोग, भय, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का नाश संभव है।
इस दिन श्री मंदिर द्वारा पंच तत्व महा रुद्राभिषेक का आयोजन हो रहा है, जो प्रकृति के पांच मूल तत्वों की ऊर्जाओं को एकजुट करता है। 5 शिवालयों में होने जा रहा यह रुद्राभिषेक अनेकों पूजाओं के बराबर माना गया है। ऐसा माना जाता है कि शिवरात्रि पर ये अनुष्ठान करने से आध्यात्मिक जुड़ाव, आंतरिक संतुलन को बढ़ावा मिलता है और बुरी शक्तियों के साथ-साथ नजर दोष से सुरक्षा की दिशा तय होती है।
🔹पांच तत्वों और इन शिवालयों का महत्व:
1️⃣ श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, मध्य प्रदेश: पवित्र मंधाता द्वीप पर स्थित, ‘ओम’ के प्रतीक के आकार का ओंकारेश्वर मंदिर, पृथ्वी तत्व की अटूट शक्ति को दर्शाता है। पृथ्वी तत्व शक्ति, स्थिरता और भक्ति को दिखाता है। पृथ्वी तत्व के के रूप में यहां चंदन अभिषेक किया जाता है।
2️⃣ महामृत्युंजय महादेव मंदिर, काशी: मां गंगा के करीब यह मंदिर जल तत्व की पवित्रता और दिव्य प्रवाह को दिखाता है। जल तत्व शुद्धि और कायाकल्प से जोड़ा जाता है, जिसका असर महामृत्युंजय मंत्र के जाप से बढ़ाया जाता है। जल तत्व को सिद्ध करने के लिए यहां गंगाजल अभिषेक किया जाता है।
3️⃣ मंगलनाथ महादेव मंदिर, उज्जैन: मंगल (जो भगवान शिव के पसीने से पैदा हुए) के साथ अपने जुड़ाव के लिए जाना जाता है। यह मंदिर परिवर्तन की ऊर्जा को दर्शाता है। अग्नि तत्व, शुद्धि और मजबूती का प्रतीक है। अग्नि तत्व के रूप में यहां रुद्र होम का आयोजन किया जाता है।
4️⃣ पशुपतिनाथ महादेव मंदिर, हरिद्वार: हिमालय के प्रवेश द्वार के रूप में हरिद्वार, जीवन की शांति और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है। वायु तत्व, गति और मुक्ति को दिखाता है। वायु तत्व को पूजने के लिए यहां काला तिल और धूप अभिषेक किया जाता है।
5️⃣ श्री गौरी-केदारेश्वर महादेव मंदिर, काशी: भगवान शिव खिचड़ी से शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए, जिन्हें ‘गौरी केदारेश्वर’ नाम से जाना जाता है। काशी का ये शिवलिंग दो भागों से बना है, जो हरि-हर का प्रतीक है।