पापमोचनी एकादशी को सनातन परंपरा में आत्मशुद्धि और कर्मशोधन की विशेष तिथि मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत, जप और पूजा व्यक्ति के संचित कर्मों के बोझ को हल्का करने का माध्यम बनता है। यह धारणा है कि पापमोचनी एकादशी केवल व्यक्तिगत पापों को शुद्ध करने का अवसर नहीं मानी जाती, बल्कि इस पवित्र तिथि पर की गई केंद्रित ग्रह उपासना कुंडली में स्थित पीड़ित पाप ग्रहों को भी शांत करने का मार्ग प्रशस्त करती है। जब श्रद्धा के साथ ग्रह पूजा की जाती है, तब अशुभ प्रभावों की तीव्रता कम होने लगती है और वही ग्रह धीरे धीरे सहयोगी परिणाम देने की दिशा में प्रवृत्त हो सकते हैं।
जब ग्रहों के असंतुलन का प्रभाव जीवन में स्पष्ट रूप से महसूस होने लगे, तब यह आवश्यक हो जाता है कि केवल मानसिक प्रार्थना ही नहीं, बल्कि विधिवत ग्रह शांति उपाय भी किए जाएँ। ऐसा माना जाता है कि कुंडली में शनि, राहु, केतु या मंगल जैसे ग्रह जब अशांत होते हैं, तब जीवन में रुकावटें, देरी, मानसिक दबाव और आर्थिक उलझनें बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में आंतरिक शांति के साथ साथ ग्रह संतुलन की साधना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी आध्यात्मिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नवग्रह शांति पूजा, शनि तिल तेल अभिषेक और पाप ग्रह शांति यज्ञ का आयोजन श्री नवग्रह शनि मंदिर में किया जा रहा है।
इस अनुष्ठान में सूर्य से लेकर केतु तक सभी नौ ग्रहों का विधिवत आह्वान कर वैदिक मंत्रों के साथ शांति की प्रार्थना की जाएगी, जिससे ग्रहों के असंतुलन को शांत करने का प्रयास किया जा सके। इसके साथ ही शनि तिल तेल अभिषेक संपन्न किया जाएगा, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि तिल और तिल का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। अभिषेक और मंत्रजप के माध्यम से शनि की कठोरता को संतुलित करने तथा जीवन में धैर्य और स्थिरता की भावना जागृत करने का प्रयास किया जाता है, ताकि व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति सजग रह सके।
इसके पश्चात पाप ग्रह शांति यज्ञ संपन्न किया जाएगा, जिसमें विशेष हवन सामग्री के साथ राहु, केतु, मंगल और शनि की शांति हेतु आहुति अर्पित की जाएगी। यह धारणा है कि अग्नि के माध्यम से की गई प्रार्थना नकारात्मक ऊर्जा के शमन का प्रतीक मानी जाती है और मन को स्पष्टता एवं संतुलन प्रदान करने में सहायक हो सकती है। मान्यता है कि यह संपूर्ण अनुष्ठान सभी राशियों के लिए प्रभावी हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो ग्रहजनित बाधाओं या मानसिक अस्थिरता का अनुभव कर रहे हों। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में भाग लेकर नवग्रहों की कृपा की प्रार्थना कर सकते हैं।