महामृत्युंजय मंत्र को सनातन धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्रों में से एक माना जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जपा जाता है और विशेष रूप से रोग, भय और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए प्रभावी माना गया है। मान्यता है कि जब यह मंत्र महाशिवरात्रि जैसे शुभ दिन पर जपा जाता है, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन की दिव्य ऊर्जा मंत्र की शक्ति को और अधिक प्रभावशाली बना देती है। भगवान शिव केवल संहारक ही नहीं, बल्कि करुणामय और रक्षक भी हैं। वे अपने भक्तों को रोग, भय और दुःख से मुक्त करते हैं। यह महापूजा 108 ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधि-विधान से संपन्न कराई जाएगी।
भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्री मंदिर द्वारा एक विशेष महामृत्युंजय महाअनुष्ठान एवं पंचामृत रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, पवित्र ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर महामृत्युंजय मंत्र का 10,08,000 बार जाप किया जाएगा। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को विशेष रूप से स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करने वाला माना जाता है। यह स्थान नर्मदा नदी के तट पर स्थित है और अपनी दिव्य एवं उपचारात्मक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
इस दिन भगवान शिव का पंचामृत रुद्राभिषेक भी किया जाएगा, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। यह विधि तन और मन की शुद्धि का प्रतीक मानी जाती है। जब महामृत्युंजय मंत्र जाप और रुद्राभिषेक एक साथ होते हैं, तो वातावरण अत्यंत सकारात्मक, शांत और शक्तिशाली बन जाता है, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
🔱 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की ख़ासियत:
यहां नर्मदा नदी ‘ॐ’ के आकार में बहती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा मान्धाता ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी और अपने वंश को रोग एवं अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण यह स्थान महामृत्युंजय महाअनुष्ठान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, ताकि स्थान और मंत्र की संयुक्त शक्ति से भक्तों को अधिकतम लाभ मिल सके।
🙏 आप भी इस शुभ महाशिवरात्रि पर श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन अनुष्ठान में भाग लें और भगवान शिव की कृपा से रोग, भय और अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा तथा दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त करें।