कालाष्टमी भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भैरव बाबा की पूजा करते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि काल भैरव की सच्चे मन से आराधना करने पर जीवन में चल रही नकारात्मक ऊर्जा धीरे-धीरे शांत होने लगती है, मन का डर कम होता है, राहु-केतु से जुड़े दोषों का प्रभाव हल्का पड़ता है और जो काम बार-बार रुकते हैं, उनमें भी आगे बढ़ने के रास्ते बनने लगते हैं। साथ ही काल भैरव की कृपा से शत्रुओं पर विजय मिलने में मदद मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
कई बार जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी अचानक रुकावटें आने लगती हैं। काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, मन में डर या बेचैनी बनी रहती है और बिना किसी स्पष्ट कारण के नकारात्मकता महसूस होने लगती है। धार्मिक मान्यताओं में इसे बुरी नज़र, ईर्ष्या या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव माना जाता है। ऐसे समय में भगवान काल भैरव की उपासना बहुत प्रभावी मानी जाती है। कालाष्टमी के दिन व्रत, दीपदान और भैरव पूजा करने से बुरी नज़र, भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है। कई भक्त इस दिन रात के समय भी भैरव जी की विशेष पूजा करते हैं, क्योंकि इसे जागरण और साधना के लिए शुभ माना जाता है।
काल भैरव की विशेष कृपा पाने के लिए इस कालाष्टमी पर नज़र दोष शांति पूजा और हवन का आयोजन काशी स्थित काल भैरव मंदिर में किया जा रहा है। यह स्थान भगवान काल भैरव का प्रमुख धाम माना जाता है, जहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भक्तों को सुरक्षा और शांति का अनुभव होता है। इस विशेष पूजा में विधि-विधान से हवन और मंत्र जाप किए जाएंगे, जिनके माध्यम से बुरी नज़र, ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को शांत करने की प्रार्थना की जाएगी। मान्यता है कि जब यह पूजा कालाष्टमी के दिन काशी जैसे पवित्र स्थान पर की जाती है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और भक्तों को जल्दी लाभ महसूस होता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में शामिल होकर आप भी भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुरक्षा, शांति और सकारात्मकता का अनुभव कर सकते हैं।🙏