सनातन में शनिवार का दिन, शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। यह दिन कर्म, न्याय और धैर्य के कारक भगवान शनि को प्रसन्न करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाता है। इस दिन विधिपूर्वक तिल-तेल अभिषेक, दीपदान और शनि मंत्रों के जाप से साढ़ेसाती, ढैय्या, ग्रह कष्ट, मानसिक तनाव और जीवन की बाधाओं से राहत मिल सकती है। शनिवार, आत्मशुद्धि, कर्म सुधार और भाग्य जागरण का दिव्य समय है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई इस उपासना से शनि देव की कठोर दृष्टि भी कृपा में बदल जाती है, जिससे जीवन में स्थिरता, सफलता और शांति का मार्ग मजबूत होता है।
इसी महत्व के साथ उज्जैन के सबसे प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में नौ ग्रहों की शांति पूजा, शनि तिल तेल अभिषेक और पाप ग्रह शांति यज्ञ होने जा रहा है। नए साल में यदि सभी ग्रहों का आशीर्वाद मिले तो आने वाला समय कई गुना फलदायी हो सकता है। शनि को ‘कर्म और न्याय का देवता’ माना जाता है, जो हमारे वर्तमान और पिछले कर्मों का फल देते हैं। अगर सच्चे मन से विधिवत उनकी पूजा की जाए तो वे दुखों से राहत, आत्मविश्वास और जीवन में सकारात्मक बदलाव का कारक बनते हैं। इसीलिए, शनिवार के दिव्य काल में उज्जैन के प्रसिद्ध श्री नवग्रह शनि मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होने जा रहा है, जहां सभी नौ ग्रहों के दोषों से राहत की दिशा पाने हेतु शांति अनुष्ठान किए जाते हैं।
👉 इस महापूजा में शामिल है:
🔹 नवग्रह शांति पूजा - सभी नौ ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए की जाती है, जिससे जीवन में शांति, समृद्धि और सफलता आती है।
🔹 शनि तिल-तेल अभिषेक - इसमें भगवान शनि को तिल और तेल चढ़ाया जाता है, माना जाता है कि इससे साढ़े साती और ढैय्या (शनि के चुनौतीपूर्ण चरणों) की कठिनाइयों से राहत मिल सकती है।
🔹 पाप ग्रह शांति यज्ञ - राहु और केतु जैसे हानिकारक ग्रहों को शांत करने के लिए किया जाने वाला एक पवित्र अग्नि अनुष्ठान, अचानक आने वाली बाधाओं, पिछले जन्म के पापों को दूर करने में मददगार माना गया है।
यदि आप अपने जीवन में ग्रहों की स्थिति के नकारात्मक प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं, तो देर न करें।
🪔 श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष शनिवार पूजा में भाग लें और अपने जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने के लिए भगवान शनि के साथ नवग्रहों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।