सनातन परंपरा में नवग्रहों का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ये नौ ग्रह व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को प्रभावित करते हैं। इन ग्रहों की स्थिति के अनुसार ही जीवन में सुख-दुख, सफलता-विफलता, स्वास्थ्य, धन, परिवार और करियर से जुड़ी परिस्थितियाँ बनती हैं। जब कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर या अशुभ होती है, तो उसे ग्रह दोष कहा जाता है। ऐसे समय में जीवन में कई प्रकार की बाधाएँ और असंतुलन दिखाई देने लगते हैं।
कई बार ऐसा महसूस होता है कि मेहनत करने के बावजूद कार्य पूरे नहीं हो पाते, अचानक समस्याएँ सामने आ जाती हैं या मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। कभी आर्थिक स्थिति अस्थिर हो जाती है तो कभी परिवार या करियर से जुड़ी चिंताएँ बढ़ जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कई बार यह स्थितियाँ नवग्रहों के असंतुलित प्रभाव से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐसे समय में शास्त्रों में बताए गए उपाय और पूजा-अनुष्ठान जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए किए जाते हैं।
इन्हीं उपायों में से एक है नवग्रह शांति हवन और ग्रह दोष निवारण पूजा। यह अनुष्ठान नौ ग्रहों को समर्पित होता है और इसका उद्देश्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करना तथा उनके सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाना होता है। इस पूजा में वैदिक मंत्रों के साथ हवन किया जाता है और प्रत्येक ग्रह को प्रसन्न करने के लिए विशेष आहुतियाँ अर्पित की जाती हैं।
नवग्रह पूजा का महत्व प्राचीन ग्रंथों में भी बताया गया है। मान्यता है कि जब नौ ग्रहों की संयुक्त पूजा की जाती है, तो यह जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का माध्यम बनती है। इस पूजा के दौरान सूर्य से ऊर्जा और आत्मविश्वास, चंद्र से मानसिक शांति, मंगल से साहस, बुध से बुद्धि, गुरु से ज्ञान, शुक्र से सुख-समृद्धि, शनि से धैर्य, राहु से भ्रम से राहत और केतु से आध्यात्मिक संतुलन की प्रार्थना की जाती है।
चैत्र शुक्ल एकादशी का दिन भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है और इस दिन किए गए जप, दान और अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं। इसलिए इस पवित्र तिथि पर नवग्रह शांति पूजा करना ग्रहों की शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
👉 इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल हैं:
🔹 नवग्रह शांति हवन – यह एक शक्तिशाली वैदिक अग्नि अनुष्ठान है, जिसमें नौ ग्रहों के देवताओं को शांत करने और उनके शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए आहुति दी जाती है। इससे जीवन में संतुलन, समृद्धि और स्थिरता की प्रार्थना की जाती है।
🔹 ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान – इसमें विशेष प्रार्थनाएँ और अर्पण किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य शनि दोष, राहु-केतु से जुड़ी परेशानियाँ और अन्य ग्रहों से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करना होता है।
🔹 मंत्र जाप और पवित्र आहुति – अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है और अग्नि में पवित्र आहुति दी जाती है, जिससे दिव्य कृपा, सुरक्षा, स्पष्टता और समग्र कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
इस अनुष्ठान के माध्यम से भक्त नवग्रहों से प्रार्थना करते हैं कि वे जीवन में आने वाली बाधाओं को शांत करें और सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करें।
श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य नवग्रह शांति अनुष्ठान में अपना संकल्प जोड़कर आप नवग्रहों की कृपा और जीवन में संतुलन, सुरक्षा तथा शुभ ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं। 🙏