सनातन परंपरा में चैत्र नवरात्रि के नौ दिन देवी शक्ति की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। इन दिनों में भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि का अंतिम दिन यानी नवमी तिथि देवी शक्ति की आराधना संपूर्ण होने का दिन है। इस दिन घर-घर में नवदुर्गा हवन, कन्या पूजन और कन्या भोज की परंपरा निभाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन छोटी कन्याओं में देवी शक्ति का वास जाता है और उनकी पूजा करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कई बार लाख मेहनत के बाद भी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पाती और जीवन में धन का प्रवाह रुक-सा जाता है जिससे मानसिक अशांति और आत्मविश्वास में कमी आपकों चारों तरफ से घेर लेती है। ऐसे में इस पवित्र नवमी पर देवी दुर्गा की उपासना न केवल जीवन में धन के प्रवाह को सही करेगी, बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आपका खोया हुआ आत्मविश्वास फिर से लौटाएगी और आपके जीवन में सकारात्मक उर्जा का संचार हो पाएगा।
इसी भावना और नवमी पर कन्या पूजन की पावन परंपरा को एक भव्य रूप देते हुए विश्व प्रसिद्ध और अत्यंत शक्तिशाली ललिता माता शक्तिपीठ में नव दुर्गा हवन और 21 कन्याओं का पूजन, भोज, दक्षिणा और वस्त्र दान महापूजा आयोजित की जा रही है। इस पूजा में 9 वर्ष की 21 कन्याओं का विधिपूर्वक पूजन किया जाएगा। साथ ही उन्हें विधि पूर्वक भोजन कराया जाएगा, वस्त्र भेंट किए जाएंगे और श्रद्धा से दक्षिणा भी अर्पित की जाएगी।
नवदुर्गा हवन का महत्व:
नवरात्रि के दौरान की गई देवी उपासना को पूर्ण करने के लिए नवदुर्गा हवन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। पवित्र मंत्रों के साथ किया गया हवन देवी शक्ति को जागृत कर वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और भक्तों के जीवन में शुभता का संचार करने वाला माना जाता है।
9 वर्षीय 21 कन्याओं के पूजन-भोज का महत्व
इस पवित्र अनुष्ठान में 9 वर्षीय 21 कन्याओं का पूजन किया जाएगा और उन्हें भोजन कराया जाएगा। जब भक्त श्रद्धा से कन्याओं का पूजन और भोजन कराते हैं, तो यह माँ दुर्गा को प्रसन्न करने का एक पवित्र माध्यम माना जाता है। विशेष रूप से 9 वर्ष की कन्या का पूजन अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस आयु में कन्या देवी शक्ति के पवित्र स्वरूप का प्रतीक होती हैं। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई भक्त नौ दिनों तक लगातार नवरात्रि पूजा नहीं कर पाता, तो नवमी के दिन हवन, कन्या पूजन और कन्या भोज करने से भी पूरे नवरात्रि पूजा का पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। साथ ही भोज के बाद कन्याओं को दक्षिणा देने और उन्हें वस्त्र दान करने से जीवन में कभी भी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष महापूजा में सहभागी बनकर आप भी देवी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि, धन वृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का स्वागत कर सकते हैं।🙏