ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों का विशेष महत्व बताया गया है। ये ग्रह विभिन्न भावों में स्थित होकर अपनी दशा के अनुसार शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं। इन नौ ग्रहों में शनि और चंद्र का भी अपना अलग महत्व है। ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है और शनि मनुष्य के कर्मों को नियंत्रित करता है। इसी कारणवश शनि और चंद्रमा को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शनि और चंद्रमा किसी जातक की कुंडली के किसी एक भाव में स्थित हो तो एक युति का निर्माण करते हैं, जिसे विष योग कहा जाता है। यह योग कष्टकारी और अशुभ माना जाता है, क्योंकि इन ग्रहों की स्थिति से मन और कर्म दोनों प्रभावित होने लगते हैं। जिन व्यक्तियों की कुंडली में यह योग होता है उन्हें मानसिक तनाव, रिश्तों में परेशानी एवं आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है। कहा जाता है कि इस योग से पीड़ित जातक के जीवन में इतनी कठिनाइयां आने लगती है कि वह बिना सोचे-समझे कई बुरे कदम उठाने लगता है और अपनी व्यवसायिक और व्यक्तिगत जीवन को नष्ट कर बैठता है।
जहां ज्योतिष शास्त्र में इस विष योग को विनाशकारी और अशुभ बताया गया है, वहीं इसका निवारण और इससे राहत पाने के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं। ज्योतिषियो की मानें तो इस योग से राहत पाने के लिए शनि के मूल मंत्र और चंद्रमा के मूल मंत्र के जाप के साथ हवन करना चाहिए। मान्यता है कि दोनों ग्रहों को समर्पित मूल मंत्रो का जाप करने से विष योग से राहत मिलती है और जीवन में कठिनाइयों को दूर करने और मानसिक स्पष्टता का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इसलिए शनि देव को समर्पित शनिवार के दिन उज्जैन में स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 10,000 चंद्र मूल मंत्र जाप और हवन का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान श्रवण नक्षत्र के दौरान किया जाएगा, क्योंकि श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव है। ऐसे में शनिवार और श्रवण नक्षत्र के शुभ संयोग पर इस अनुष्ठान के माध्यम से शनि देव और चंद्र देव दोनों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान में भाग लें और जीवन में कठिनाइयों को दूर करने और मानसिक स्पष्टता का आशीष प्राप्त करें।