कई बार जीवन में सबकुछ होते हुए भी एक खालीपन बना रहता है। एक आम इंसान वाली ज़िंदगी तो चलती रहती है लेकिन लग्ज़री और हाई सोसाइटी वाली ख्वाहिश मन में दबी रह जाती है। अटूट मेहनत के बावजूद सफलता का वह स्तर हासिल नहीं हो पाता, जिसमें दौलत के साथ-साथ पहचान और रुतबा भी हो। ऐसी ही दबी इच्छाओं की पूर्ति और आशीर्वाद के लिए आध्यात्मिक साधना का सहारा लिया जाता है। गुप्त नवरात्रि ऐसी साधनाओं के लिए बेहद फलदायी मानी गई है। जब इसमें मेरु यंत्र मधु (शहद)-दूध अभिषेक, 1 लाख 8 नाम जाप के साथ कमल गट्टा हवन, मेरु यंत्र साधना के साथ संपन्न होता है तो आम जिंदगी को ख़ास बनाने की राह मजबूत हो सकती है।
🔥 गुप्त नवरात्रि के पावन दिनों में मां त्रिपुर सुंदरी की उपासना अत्यंत गोपनीय और फलदायी मानी गई है। वह श्रीविद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो सौंदर्य, चेतना और ब्रह्मज्ञान का स्वरूप हैं। इस काल में मां को समर्पित मेरु यंत्र पर मधु-दूध अभिषेक विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों के अनुसार, मेरु यंत्र ब्रह्मांडीय संतुलन और साधक की चेतना को उच्च स्तर से जोड़ता है। मधु और दूध का अभिषेक जीवन की कटुता, मानसिक अशांति और कर्मिक दोषों को शांति में रूपांतरित करने का प्रतीक है। श्रद्धा से किया गया यह अनुष्ठान आंतरिक सौंदर्य, मानसिक स्थिरता और देवी कृपा से जीवन में हाई सोसाइटी पहचान, राजयोग और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग खोल सकता है।
🔥 इस अनुष्ठान में शामिल मेरु यंत्र श्रीविद्या परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली यंत्र है, जिसे श्रीचक्र का त्रि-आयामी स्वरूप माना जाता है। यह ब्रह्मांड, मन और चेतना के पूर्ण संतुलन का प्रतीक है। मेरु यंत्र के प्रत्येक स्तर में देवी त्रिपुर सुंदरी की सूक्ष्म शक्तियां प्रतिष्ठित मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि में इसकी साधना का विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि इस काल में सूक्ष्म तंत्र शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं। इस समय की गई साधना साधक के भीतर छिपे भय, अवरोध और कर्मिक बंधनों को शांति में परिवर्तित करती है तथा जीवन में आराम, ज्ञान, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मजबूत होता है।
मां ललिता माता मंदिर में संपन्न होने जा रही 1,00,008 त्रिपुर सुंदरी अर्चना और कमल गट्टा हवन श्रीविद्या साधना का अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली अनुष्ठान है। मां त्रिपुर सुंदरी, जो मां ललिता का सौम्य और करुण स्वरूप हैं, सौंदर्य, संतुलन और चेतना की अधिष्ठात्री देवी हैं। शास्त्रों में कमल गट्टा को शुद्धता, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बताया गया है। मंत्रोच्चारण के साथ की गई यह अर्चना और हवन साधक के जीवन में मानसिक स्थिरता, संबंधों में मधुरता और राजयोग का संचार करता है, जिससे देवी कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
श्री मंदिर द्वारा मेरु यंत्र मधु - दूध अभिषेक, 1,00,008 त्रिपुर सुंदरी अर्चना और कमल गट्टा हवन साधना में भाग लें और राजयोग (शाही दर्जा), सुंदरता के साथ हाई-सोसाइटी पहचान का आशीर्वाद पाएं।