मार्तंड भैरव, भगवान भैरव का एक अत्यंत तेजस्वी और आध्यात्मिक रूप माना जाता है, जिसका संबंध सूर्य तत्व से जोड़ा जाता है। “मार्तंड” शब्द सूर्य का द्योतक है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव सृष्टि में प्रकाश, चेतना और जीवन शक्ति का संचार करते हैं। वे केवल भौतिक प्रकाश ही नहीं देते, बल्कि आत्मबल, स्पष्टता और जागरूकता के भी प्रतीक हैं। इसी कारण सूर्य को नवग्रहों का अधिपति कहा गया है।
भगवान भैरव, देवों के देव महादेव का उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। धर्म की रक्षा करना और नकारात्मक शक्तियों का विनाश करना उनका प्रमुख स्वरूप माना जाता है। तांत्रिक परंपराओं में भैरव साधना को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि जब जीवन में भय, अस्थिरता, भ्रम या अदृश्य बाधाएं बढ़ती हैं, तब भैरव उपासना साधक को आंतरिक दृढ़ता प्रदान करती है।
मार्तंड भैरव का स्वरूप सूर्य की प्रकाशमय ऊर्जा और भैरव की परिवर्तनकारी शक्ति का संगम माना जाता है। इसमें तेज, साहस और संरक्षण तीनों तत्वों का समावेश दिखाई देता है। यह धारणा है कि इस रूप की आराधना व्यक्ति को आत्मविश्वास, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक जागरूकता की दिशा में प्रेरित करती है। यह उपासना केवल बाहरी बाधाओं से रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को समझकर उन्हें रूपांतरित करने का संकेत भी मानी जाती है।
रविवार का दिन सूर्य उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इसी भाव से श्री विक्रांत भैरव मंदिर में मार्तंड भैरव पूजन, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ और नवग्रह शांति यज्ञ का आयोजन किया जाता है। आदित्य हृदय स्तोत्र को सूर्य की कृपा और आत्मबल के जागरण से जोड़ा जाता है, जबकि नवग्रह शांति यज्ञ ग्रहों के संतुलन हेतु एक पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि सूर्य और भैरव की संयुक्त उपासना जीवन में अनुशासन, स्पष्ट निर्णय शक्ति और स्थिरता का भाव उत्पन्न करती है। यह साधना व्यक्ति को अपने कर्म, समय और जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाती है। ग्रह दोषों और मानसिक असंतुलन के संदर्भ में भी इस प्रकार की आराधना को संतुलन और आत्मचिंतन का माध्यम समझा जाता है।
मार्तंड भैरव की उपासना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि तेज, संयम और आंतरिक जागरण का प्रतीक है। यह साधक को स्वयं के भीतर स्थित प्रकाश को पहचानने और उसे धर्ममय जीवन में रूपांतरित करने की प्रेरणा देती है। ऐसे में जो साधक इस दिव्य साधना से जुड़ना चाहते हैं, वे श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन अनुष्ठान में भाग ले सकते हैं और मार्तंड भैरव की आराधना का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।