सनातन परंपरा में उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी और दिव्य शक्ति का जागृत केंद्र माना जाता है। यह वही पवित्र भूमि है जहाँ भैरव उपासना का विशेष महत्व है और भक्त जीवन की सुरक्षा, साहस और बाधाओं से राहत के लिए यहाँ प्रार्थना करते हैं। उज्जैन के श्री विक्रांत भैरव मंदिर में भगवान भैरव के प्रभावशाली रूप मार्तंड भैरव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जब जीवन में बिना कारण विरोध बढ़ने लगे, ईर्ष्या करने वाले लोग परेशान करें, कार्यों में बार-बार बाधाएँ आएँ या मानसिक दबाव और कानूनी समस्याएँ सामने आने लगें, तब मार्तंड भैरव की आराधना साधक के चारों ओर एक शक्तिशाली आध्यात्मिक सुरक्षा का भाव जगाती है।
रविवार को सूर्य देव का दिन माना जाता है। सूर्य को ऊर्जा, आत्मबल, स्वास्थ्य और विजय का प्रतीक कहा जाता है। रामायण में उल्लेख मिलता है कि जब भगवान श्रीराम युद्ध के समय कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे थे, तब उन्होंने आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया था। सूर्य देव की कृपा से उन्हें अद्भुत शक्ति, आत्मविश्वास और अंततः विजय प्राप्त हुई। उसी भावना से इस विशेष अनुष्ठान में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया जाता है, जिसे जीवन में साहस, स्पष्ट सोच और सफलता की दिशा से जोड़ा जाता है।
इस दिव्य अनुष्ठान में मार्तंड भैरव पूजन, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ और नवग्रह शांति यज्ञ एक साथ संपन्न किए जाते हैं। भैरव पूजा को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा और शत्रु बाधाओं को शांत करने का प्रतीक माना जाता है। सूर्य देव की आराधना जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास को जागृत करने से जुड़ी मानी जाती है। वहीं नवग्रह शांति यज्ञ ग्रहों के असंतुलन को शांत करने और जीवन में आने वाली रुकावटों को कम करने की प्रार्थना का माध्यम है। जब ये तीनों साधनाएँ एक साथ की जाती हैं, तो इसे शक्ति, सुरक्षा और विजय प्रदान करने वाला संपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है।
प्राचीन समय से उज्जैन समय, ग्रहों और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ की गई भैरव साधना साधक के मन से अदृश्य भय को दूर करने का भाव देती है, वहीं सूर्य उपासना जीवन में नई ऊर्जा भरने से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए विक्रांत भैरव मंदिर में संपन्न यह पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
आज के समय में कई लोग बिना कारण शत्रु बाधाओं, कोर्ट-कचहरी के तनाव, मानसिक थकान और आत्मविश्वास की कमी का अनुभव करते हैं। इस विशेष अनुष्ठान का भाव यह है कि सूर्य देव के तेज और मार्तंड भैरव की रक्षक शक्ति से साधक को नई ऊर्जा, साहस और स्थिरता प्राप्त हो।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र अनुष्ठान में अपना संकल्प जोड़कर आप ईर्ष्या और विरोध से सुरक्षा, नकारात्मक लोगों से रक्षा, स्वास्थ्य में सुधार, आत्मबल में वृद्धि और कठिन परिस्थितियों में विजय की प्रार्थना कर सकते हैं। यह साधना जीवन में सकारात्मक शक्ति, स्पष्ट दिशा और निर्भयता का अनुभव करने का एक दिव्य अवसर मानी जाती है।