🛕मंगल दोष को परंपरागत रूप से विवाह में देरी, रिश्तों में बार-बार रुकावट और भावनात्मक असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब कुंडली में मंगल का प्रभाव असंतुलित हो जाता है, तो गलतफहमियाँ, तनाव और वैवाहिक जीवन में अस्थिरता बढ़ सकती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए मांगलिक दोष शांति पूजा की जाती है, जिसका उद्देश्य ग्रहों की असंतुलित ऊर्जा को शांत कर जीवन में सामंजस्य लाना होता है। यह पूजा मंगल के उग्र प्रभाव को शांत करती है और उसके सकारात्मक गुण- साहस, प्रतिबद्धता और स्थिरता को मजबूत करती है। ग्रहों की ऊर्जा संतुलित होने से मन का संतुलन बढ़ता है, छिपी रुकावटें दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में आने वाली बार-बार की समस्याओं से रक्षा मिलती है।
🛕इस पावन अनुष्ठान में मांगलिक दोष शांति पूजा, पीपल वृक्ष पूजा और मंगल दान कुंजिका को वैदिक विधि से एक साथ किया जाता है। पीपल वृक्ष पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि पीपल में दिव्य ऊर्जा का वास माना गया है, जो विवाह में देरी, मन का तनाव और ग्रहों से जुड़ी रुकावटों को कम करने में सहायक होती है। मंगल दान कुंजिका इस प्रभाव को और मजबूत करती है, मंगल के प्रभाव को संतुलित करती है और वैवाहिक भाग्य को बेहतर बनाती है। ये तीनों विधियाँ मिलकर रिश्तों में साहस, स्थिरता और जिम्मेदारी का भाव बढ़ाती हैं और मांगलिक दोष से जुड़ी तात्कालिक व दीर्घकालिक समस्याओं से राहत देती हैं।
🛕 यह पूजा श्री मंगलनाथ महादेव मंदिर, उज्जैन में संपन्न की जाती है, जिसे मंगल देव का प्राचीन और प्रमुख स्थान माना जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर की गई पूजा का फल विशेष रूप से प्रभावी होता है, क्योंकि यह मंदिर सीधे मंगल देव से जुड़ा है। यह अनुष्ठान खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो विवाह में देरी, रिश्तों में बार-बार परेशानी या मांगलिक दोष से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से भक्त घर बैठे इस पूजा में शामिल हो सकते हैं और मंगल देव, पीपल पूजा तथा मंगल दान कुंजिका का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं, जिससे रिश्तों में स्थिरता, सामंजस्य और सुख बना रहता है।