🌸 वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, कर्म और वैवाहिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। जब कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक नहीं होती, तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। मान्यता है कि इसके कारण विवाह में देरी, रिश्तों में गलतफहमी या वैवाहिक जीवन में रुकावटें आ सकती हैं। ऐसे में शास्त्रों में मंगल देव की पूजा विशेष स्थान पर करने की सलाह दी गई है।
🌸 पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंगल देव का जन्म भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। मत्स्य पुराण में बताया गया है कि जब भगवान शिव ने अंधकासुर से युद्ध किया, तब उनके शरीर से गिरी एक पसीने की बूंद से एक दिव्य बालक का जन्म हुआ, जिसे बाद में मंगल देव के रूप में जाना गया। जिस स्थान पर यह दिव्य घटना हुई, वही स्थान आज उज्जैन में स्थित श्री मंगलनाथ महादेव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
🌸 इस कारण यह स्थान मंगल देव का जन्मस्थान माना जाता है और यहां की गई पूजा को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यहाँ मांगलिक दोष निवारण महापूजा, भात पूजा और श्री मंगलनाथ महाभिषेक करने से विवाह में आने वाली बाधाएं कम होने और रिश्तों में संतुलन आने की मान्यता है।
🌸 इस पूजा का एक महत्वपूर्ण भाग है भात पूजा, जिसमें चावल अर्पित किए जाते हैं। चावल को शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। यह पूजा मंगल की तीव्र ऊर्जा को संतुलित करने और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाने के लिए की जाती है। मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित होता है। इस दिन उनके जन्मस्थान पर की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से मांगलिक दोष के प्रभाव कम होते हैं, विवाह में आ रही देरी दूर होती है और जीवन में प्रेम, समझ और संतुलन आता है।
🌸 श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में जुड़कर आप भी अपने नाम से संकल्प कर सकते हैं और मंगल देव से सुखद रिश्तों, समय पर विवाह और खुशहाल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।