🌞 मकर संक्रांति के दिन सूर्य की ऊर्जा अत्यंत प्रबल हो जाती है, क्योंकि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का शुभ आरंभ होता है। इस अवसर पर सूर्य अर्घ्य, 51,000 सूर्य गायत्री मंत्र जाप और आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ के साथ बगलामुखी महायज्ञ करने से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक बुद्धि में वृद्धि होती है, साथ ही शत्रुओं से रक्षा भी मिलती है। राजनीति से जुड़े लोगों और सरकारी क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के लिए सूर्य को नेतृत्व का प्रधान कारक माना गया है, जिससे इस पूजा का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
🔥 मकर संक्रांति पर सूर्य–बगलामुखी संयुक्त विशेष महायज्ञ पवित्र मां बगलामुखी मंदिर, हरिद्वार में संपन्न किया जाता है। इसमें सूर्य देव और माँ बगलामुखी—दोनों की संयुक्त शक्तियाँ जागृत की जाती हैं। सूर्य देव नेतृत्व, अधिकार, आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं, जबकि माँ बगलामुखी को शत्रुओं को निष्क्रिय करने, बाधाओं को दूर करने और विजय दिलाने वाली देवी माना जाता है। यह विशेष पूजा राजनीतिक विरोधियों पर विजय और सरकारी मामलों में सफलता के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
🔥 माँ बगलामुखी की कृपा से साधक को विरोधियों पर नियंत्रण, छिपे शत्रुओं से रक्षा और करियर व राजनीति में निर्णायक बढ़त प्राप्त होती है। वैदिक मंत्रों और अग्नि कर्म से किया गया यह महायज्ञ सरकारी अड़चनों को दूर करता है और व्यक्ति की सत्ता, प्रभाव और आत्मबल को मजबूत करता है।
✨ माँ बगलामुखी मंदिर, हरिद्वार में होने वाले इस मकर संक्रांति सूर्य–बगलामुखी महायज्ञ में भाग लेकर भक्त ब्रह्मांडीय शक्तियों से जुड़ते हैं और नेतृत्व में वृद्धि, रणनीतिक सफलता तथा राजनीतिक व सरकारी विवादों में विजय के साथ सूर्य देव और माँ बगलामुखी की सुरक्षा व सशक्त कृपा प्राप्त करते हैं।