सनातन ज्योतिष में नवग्रहों को दो स्वभावों में देखा गया है, सौम्य ग्रह और उग्र ग्रह। सौम्य ग्रह शांति और संतुलन देने वाले माने जाते हैं, जबकि उग्र ग्रह अत्यंत शक्तिशाली होते हैं और जब उनका प्रभाव असंतुलित हो जाए तो जीवन में तीव्र उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। राहु, शनि, केतु और मंगल को उग्र ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। इनमें भी राहु का प्रभाव मन, निर्णय क्षमता, करियर की दिशा, भ्रम, अचानक बनने-बिगड़ने वाली परिस्थितियों और बार-बार आने वाले दुर्भाग्य से जोड़ा जाता है। जब राहु अशांत होता है तो व्यक्ति को बिना कारण अस्थिरता, अवसरों का हाथ से निकल जाना, बार-बार योजना बदलना, मानसिक उलझन और करियर में रुकावट जैसी स्थितियों का अनुभव हो सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में उग्र ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है या राहु दोष जीवन में बाधा बनने लगता है, तब भगवान शिव की उपासना को सबसे प्रभावशाली उपाय माना गया है। भगवान शिव के अनेक स्वरूपों में भगवान महामृत्युंजय को विशेष रूप से रक्षा, दीर्घ आयु, संकट शांति और ग्रह दोष निवारण के लिए पूजनीय माना गया है। महामृत्युंजय मंत्र को ऐसा दिव्य मंत्र बताया गया है जो भय, भ्रम और नकारात्मक ग्रह प्रभावों को शांत कर जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव जगाता है।
राहु नक्षत्र का समय राहु से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किया गया महामृत्युंजय मंत्र जाप साधक के मन और जीवन पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालने की भावना से जुड़ा होता है। इसलिए इस पावन अवसर पर राहु दोष निवारण हेतु महामृत्युंजय जाप का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान केवल ग्रह शांति के लिए नहीं, बल्कि जीवन में बार-बार बनने वाले दुर्भाग्य के चक्र को तोड़ने, मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने और करियर में स्थिरता लाने की प्रार्थना का माध्यम है।
महामृत्युंजय मंत्र का प्रत्येक उच्चारण शिव की उस कृपा को आमंत्रित करता है जो भय को साहस में, भ्रम को स्पष्टता में और अस्थिरता को संतुलन में बदलने की शक्ति रखती है। मान्यता है कि जब यह मंत्र वैदिक विधि से जाप किया जाता है तो राहु के कारण बनने वाली तीव्र मानसिक उलझन, अचानक आने वाली रुकावटें और दिशा हीनता धीरे-धीरे शांत होने लगती है।
आज के समय में कई लोग मेहनत करने के बाद भी करियर में स्थिरता नहीं बना पाते, बार-बार परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, मन किसी निर्णय पर टिक नहीं पाता और एक अदृश्य रुकावट का अनुभव होता है। पारंपरिक मान्यता में यह राहु के अशांत प्रभाव से जुड़ा माना जाता है। ऐसे समय में राहु नक्षत्र पर किया गया महामृत्युंजय जाप जीवन की नकारात्मक गति को बदलकर सकारात्मक दिशा देने का आध्यात्मिक माध्यम माना जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष राहु शांति अनुष्ठान में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप भगवान महामृत्युंजय की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह साधना मानसिक स्पष्टता, करियर में स्थिरता, दुर्भाग्य के चक्र से राहत और जीवन में नई सकारात्मक शुरुआत का दिव्य अवसर मानी जाती है।