🪷 सनातन धर्म में माँ लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना गया है। मान्यता है कि जहाँ उनकी कृपा होती है, वहाँ सुख, शांति और स्थिरता अपने आप आती है। गुप्त नवरात्रि की पंचमी देवी माँ की सूक्ष्म और शक्तिशाली उपासना का विशेष दिन माना जाता है। वहीं, जब यह पंचमी शुक्रवार को आती है, जो माँ लक्ष्मी का प्रिय दिन है, तब पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस शुभ अवसर में की गई पूजा मन को शुद्ध करती है, आर्थिक संतुलन लाती है और जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि का मार्ग खोलती है। जो भक्त माँ लक्ष्मी को अपनी इष्ट देवी मानते हैं, उनके लिए यह पूजा उनसे गहरा संबंध जोड़ने का विशेष अवसर होती है।
🪷वहीं जब यह पूजा शक्तिपीठ माँ महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर, कोल्हापुर में की जाती है, तो इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पुराणों के अनुसार, देवी सती के दोनों नेत्र यहाँ गिरे थे और तभी से यहाँ माँ लक्ष्मी की उपासना होती है। इस 7,000 वर्ष से ज्यादा पुराने मंदिर में विराजमान माँ लक्ष्मी की प्रतिमा को विद्वान चमत्कारी मानते हैं। वर्ष में तीन बार सूर्य की किरणें सीधे माँ महालक्ष्मी पर पड़ती हैं, जिसे भक्त विशेष कृपा का संकेत मानते हैं। शुक्रवार के दिन यहाँ की गई पूजा आर्थिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी जाती है।
🪷 शास्त्रों में महालक्ष्मी मंत्र को माँ लक्ष्मी की कृपा पाने का सरल मार्ग बताया गया है। शुक्रवार को इस मंत्र का जाप आर्थिक जीवन में संतुलन लाने और रुकावटें दूर करने में सहायक माना गया है। माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों में वैभव लक्ष्मी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि वैभव लक्ष्मी पूजा और हवन से घर में समृद्धि का वातावरण बनता है और अभाव कम होता है। इसी उद्देश्य से इस शुक्रवार को शक्तिपीठ माँ महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर, कोल्हापुर में 11,000 महालक्ष्मी मंत्र जाप, वैभव लक्ष्मी पूजा और धन-समृद्धि हवन का आयोजन किया जा रहा है।
श्री मंदिर के माध्यम से भक्त इस विशेष पूजा में जुड़कर माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मकता का स्वागत कर सकते हैं।