हिंदू पंचाग के अनुसार के आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष से गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो जाता है। इन दिनों में दस महाविद्याओं की साधना का विधान माना गया है। गुप्त नवरात्रि के दौरान तंत्र साधनाओं का अत्यधिक महत्त्व होता है और इन्हें अत्यंत गुप्त रूप से किया जाता है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। तंत्र शास्त्र में माँ काली बहुत महत्वपूर्ण देवी मानी जाती हैं। कहते हैं कि गुप्त नवरात्रि में मां काली की विशेष पूजा कर साहस प्राप्ति एवं बाधाओं से सुरक्षा का आशीर्वाद पाया जा सकता है। मान्यता है कि देवी काली की पूजा नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट करने और साहस बढ़ाने के लिए बेहद कारगर है।
कहते हैं सृष्टि की रचना से पहले देवी महाकाली अंधकार के रूप में सब तरफ विद्यमान थीं। सृष्टि को प्रारंभ करने के लिए देवी ने ज्योति स्वरुप में मां तारा को प्रकट किया एवं प्रकृति की रचना शुरू की। इसी कारण पश्चिम बंगाल के श्री तारापीठ मंदिर में देवी महाकाली की पूजा का विशेष महत्त्व है। इसलिए गुप्त नवरात्रि के शुभ अवसर पर इस शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना कर देवी काली से साहस एवं शक्ति का परम आशीर्वाद पाया जा सकता है। इस गुप्त नवरात्रि पर इस दिव्य शक्तिपीठ में दिव्य महाकाली तंत्र युक्त हवन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्री मंदिर के माध्यम से भाग लें और साहस प्राप्ति के साथ बाधाओं से सुरक्षा का आशीष पाएं।