📿 गुप्त नवरात्रि की अष्टमी, तंत्रोक्त साधना की दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली तिथि मानी गई है। इस दिन की गई साधना शीघ्र फल देने वाली होती है और गहन आध्यात्मिक परिवर्तन के द्वार खोल सकती है। अष्टमी तिथि मां तारा को समर्पित मानी जाती है, जो दस महाविद्याओं में द्वितीय स्थान पर विराजमान हैं। माँ तारापीठ की साधना भय, संकट और मानसिक अशांति से मुक्ति प्रदान करती है। उन्हें तारण करने वाली देवी कहा गया है, जो भक्तों को कठिन से कठिन परिस्थितियों और कर्मबंधन से बाहर ले जाती हैं। मां तारा की अक्षोभय भैरव के साथ संयुक्त साधना भक्तों के जीवन में असीम शांति लाने के साथ डर पर काबू पाने के रास्ते तैयार कर सकती है।
सनातन में माँ तारा पूजन और अक्षोभ्य भैरव पंचामृत अभिषेक तांत्रिक साधना की अत्यंत प्रभावशाली विधि मानी गई है। माँ तारा करुणा, संरक्षण और तारण शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, जबकि अक्षोभ्य भैरव उनकी उग्र और रक्षक शक्ति के रूप में पूजित होते हैं। इन दोनों की संयुक्त उपासना से भय, शत्रु बाधा और मानसिक अस्थिरता शांत होती है।
पंचामृत अभिषेक के माध्यम से अक्षोभ्य भैरव की उग्र ऊर्जा को संतुलित कर साधक के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा स्थापित की जाती है। इसके साथ किया गया महायज्ञ वातावरण को शुद्ध करता है और साधना की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है। इस विशेष अनुष्ठान से भक्तों को साहस, स्पष्टता, आध्यात्मिक संरक्षण और जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति प्राप्त हो सकती है।
📿 गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि माँ तारा और अक्षोभ्य भैरव की संयुक्त उपासना के लिए अत्यंत फलदायी हो सकती है। मां तारा करुणा, संरक्षण और तारण शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, जबकि अक्षोभ्य भैरव उनके रक्षक और उग्र स्वरूप के रूप में पूजित होते हैं। दोनों की संयुक्त उपासना से भय, शत्रु बाधा और मानसिक अस्थिरता शांत होती है। यह साधना साधक को आंतरिक साहस, स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान करती है। मंत्र जप, पंचामृत अभिषेक और यज्ञ के माध्यम से की गई यह उपासना आध्यात्मिक सुरक्षा, स्पष्टता और जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति दे सकती है।
🔱 श्री मंदिर द्वारा आयोजित होने जा रहे इस दिव्य अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर हाथ से न जाने दें!