कई बार मन में अच्छे विचार होते हैं, ज्ञान भी होता है, लेकिन सही समय पर बोलने में झिझक आ जाती है। शब्दों में प्रभाव नहीं रह जाता, मंच पर बोलते समय आत्मविश्वास डगमगा जाता है या ज़रूरी बातचीत में अपनी बात ठीक से नहीं रख पाते। सनातन धर्म में इसे वाक् शक्ति का असंतुलन माना गया है, जो वाणी और बुद्धि से जुड़ी दिव्य शक्ति है।
शास्त्रों में बताया गया है कि जब ज्ञान और अभिव्यक्ति की शक्ति पूरी तरह जाग्रत नहीं होती, तब संवाद में भ्रम, अवसरों की कमी और जीवन में रुकावटें आने लगती हैं। स्पष्ट और प्रभावशाली वाणी केवल अभ्यास से नहीं, बल्कि देवी की कृपा से प्राप्त होने वाला गुण है।
माँ मातंगी को आंतरिक अभिव्यक्ति और प्रभावशाली वाणी की महाविद्या माना जाता है। वे सत्य को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त करने की शक्ति देती हैं। वहीं माँ सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और स्पष्ट सोच की देवी हैं। जब इन दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है, तब वाणी में संतुलन, स्पष्टता और प्रभाव आ जाता है।
गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि को देवी की गुप्त शक्तियाँ पूर्ण रूप से जाग्रत मानी जाती हैं। इस दिन की गई साधना से छिपी प्रतिभाएँ उभरती हैं, बोलने का डर कम होता है और मन व वाणी के बीच सामंजस्य बनता है।
शास्त्रों के अनुसार माँ मातंगी नौवीं महाविद्या हैं और वाणी, संगीत व कला की देवी हैं। मान्यता है कि वे अपने भक्तों के कंठ में वास करती हैं, जिससे उनकी बात लोगों के मन तक पहुँचती है। पुराणों में उल्लेख है कि बड़े-बड़े ऋषि भी वेदों और वाद-विवाद में सिद्धि पाने के लिए माँ मातंगी की उपासना करते थे। माँ सरस्वती ज्ञान का भंडार देती हैं और माँ मातंगी उस ज्ञान को प्रभावशाली शब्दों में बदलने की शक्ति देती हैं।
🌸108 लौंग आहुति हवन का महत्व
हरिद्वार स्थित सिद्ध पीठ में होने वाली इस विशेष पूजा में हवन अग्नि में 108 लौंग अर्पित की जाती हैं। शास्त्रों में लौंग को माँ मातंगी को प्रिय बताया गया है, जो वाणी तत्व को शुद्ध करती है। यह हवन वाणी और मन से जुड़े अवरोधों को दूर करने के लिए किया जाता है। इस साधना से वाक् सिद्धि प्राप्त होने की मान्यता है, जिससे व्यक्ति की बात में प्रभाव, मधुरता और सम्मान बढ़ता है।
श्री मंदिर के माध्यम से यह विशेष पूजा आपको ज्ञान, आत्मविश्वास और स्पष्ट वाणी का दिव्य आशीर्वाद प्रदान करती है।