🌸 कई बार हमारे जीवन की सबसे बड़ी बाधा हम स्वयं ही बन जाते हैं। हम देखते हैं कि मेहनत करने के बावजूद एक कड़वा शब्द या नकारात्मक सोच हमारे प्रयासों और रिश्तों को बिगाड़ देती है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे वाणी दोष कहा जाता है, जब हमारी वाणी उन्नति के बजाय नुकसान का कारण बन जाती है। जब मन संदेह से भरा हो और शब्द कठोर हों, तो यह संकेत है कि बुद्धि की शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए मां सरस्वती और मां मातंगी की कृपा ली जाती है।
🌸 शास्त्रों के अनुसार मां मातंगी, मां ललिता त्रिपुरसुंदरी की मंत्रिणी हैं और वाणी व कला की शक्ति का प्रतीक हैं। मां सरस्वती ज्ञान देती हैं, जबकि मां मातंगी उस ज्ञान को सुंदर और प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की शक्ति प्रदान करती हैं। मान्यता है कि विद्वान भी वाक् सिद्धि के लिए मां मातंगी की उपासना करते थे। उनकी कृपा से भ्रम दूर होता है और बुद्धि के भीतर के शत्रु जैसे आलस्य और भटकाव समाप्त होते हैं।
🌸 बसंत पंचमी के शुभ दिन यह विशेष पूजा की जाती है। इसमें हवन के दौरान 108 लौंग अग्नि में अर्पित की जाती हैं। कुलार्णव तंत्र के अनुसार लौंग वाणी और विचारों से जुड़ी नकारात्मकता को दूर करने में सहायक मानी जाती है। श्रद्धा से की गई यह आहुति मन को तेज और विचारों को सकारात्मक बनाती है। सरस्वती पूजा और मातंगी हवन का यह संयोजन मधुर वाणी और शांत मन प्रदान करता है।
🌸 श्री मंदिर द्वारा की जाने वाली यह विशेष पूजा जीवन में ज्ञान, स्पष्ट वाणी और मानसिक शांति का आशीर्वाद देने के लिए की जाती है। हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन यह पूजा आत्मचिंतन, जागरूकता और आंतरिक संतुलन के लिए एक सहायक माध्यम है।