सनातन धर्म में माँ लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। उन्हीं का एक विशेष रूप माँ कमलात्मिका के रूप में पूजा जाता है, जो दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या मानी जाती हैं। माँ कमलात्मिका का स्वरूप केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जीवन में संतुलन, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में भी जानी जाती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कमल का फूल भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप से उत्पन्न माना जाता है और उसी कमल का बीज कमल गट्टा कहलाता है। यही कारण है कि कमल गट्टा माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है। जैसे भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, उसी प्रकार माँ लक्ष्मी को कमल गट्टा अर्पित करने से आर्थिक समस्याओं में कमी आने और जीवन में समृद्धि बढ़ने की भावना जुड़ी होती है।
इस विशेष पूजा में माँ कमलात्मिका को 10,008 कमल गट्टा बीज अर्पित किए जाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में कमल गट्टा अर्पण इस अनुष्ठान को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। यह पूजा धन आकर्षण, आर्थिक स्थिरता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने के उद्देश्य से की जाती है।
इसके साथ ही इस अनुष्ठान में कुबेर देव की पूजा भी की जाती है, जिन्हें धन के देवता और धन के संरक्षक के रूप में जाना जाता है। केवल धन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे सुरक्षित रखना और सही दिशा में उपयोग करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। कुबेर पूजा इस संतुलन को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
माँ लक्ष्मी और कुबेर देव की संयुक्त उपासना जीवन में धन के आगमन और उसके संरक्षण दोनों को संतुलित करने का माध्यम मानी जाती है। यह पूजा व्यक्ति को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी संतुलित और संतुष्ट रहने की प्रेरणा देती है।
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा का दिन इस पूजा के लिए शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समय नए आरंभ और संतुलन की ऊर्जा से जुड़ा होता है। इस दिन की गई पूजा का प्रभाव अधिक गहरा और फलदायी माना जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान में शामिल होकर आप अपने नाम और संकल्प के साथ इस पूजा का हिस्सा बन सकते हैं। यह एक ऐसा अवसर है जहां आप माँ कमलात्मिका और कुबेर देव की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन में धन, स्थिरता और समृद्धि का अनुभव कर सकते हैं।