गुप्त नवरात्रि के अंतिम तीन दिन अत्यंत गहन और निर्णायक माने जाते हैं। इन दिनों की साधना को पहले दिनों में जाग्रत की गई ऊर्जा को स्थिर करने और जीवन में ठोस रूप से उतारने का समय माना जाता है। ये तीन दिन जीवन को संचालित करने वाले तमस, सत्व और रजस गुणों के अंतिम संतुलन से जुड़े होते हैं। जब ये गुण असंतुलित रहते हैं, तो जीवन में कानूनी अड़चनें, आर्थिक अस्थिरता, स्वास्थ्य समस्याएँ, मानसिक दबाव और बार-बार दोहराने वाले कर्म अनुभव में आने लगते हैं। अंतिम तीन दिनों में की गई केंद्रित साधना, मंत्र जप और यज्ञ के माध्यम से इन गहरी जमी ऊर्जाओं को शांत और संतुलित करने का प्रयास किया जाता है।
✨ अंतिम 3 दिवस, 3 ब्राह्मण त्रिगुण गुप्त नवरात्रि विशेष के अंतर्गत तीन दिनों में कुल 1,00,008 मूल मंत्र जप और महा यज्ञ शास्त्रानुसार विधि से संपन्न किए जाते हैं। यह साधना तांत्रिक परंपरा के अनुसार क्रमबद्ध होती है, जहाँ प्रत्येक दिन एक विशेष गुण को संतुलित करने पर केंद्रित रहता है, ताकि साधक के जीवन में परिवर्तन स्थिर और व्यावहारिक रूप से स्थापित हो सके।
🔱 दिन 7: 33,336 माँ काली मूल मंत्र जप एवं महा यज्ञ
यह चरण तमस गुण से संबंधित माना जाता है, जो भय, जड़ता और नकारात्मकता का कारण बनता है। इस दिन की साधना का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही कानूनी अड़चनें, शत्रु बाधाएँ, दबे हुए भय और बिना कारण उत्पन्न हो रहे विरोध को शांत करना होता है। यह उन साधकों के लिए उपयोगी मानी जाती है जो जीवन में बार-बार अवरोध या असहज परिस्थितियों का सामना कर रहे हों।
🔱 दिन 8: 33,336 माँ तारा मूल मंत्र जप एवं महा यज्ञ
यह दिन सत्व गुण को स्थिर करने के भाव से जुड़ा होता है। इससे मानसिक स्पष्टता, संरक्षण और मार्गदर्शन की भावना मजबूत होती है। यह साधना भ्रम, भावनात्मक तनाव, स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और निर्णय लेने में आ रही उलझनों को शांत करने में सहायक मानी जाती है।
🔱 दिन 9: 33,336 माँ षोडशी मूल मंत्र जप एवं महा यज्ञ
अंतिम दिन रजस गुण को संतुलित किया जाता है, जो कर्म, प्रयास और प्रगति से जुड़ा होता है। इस साधना को आर्थिक अड़चनों, आत्मविश्वास की कमी और अवसरों में आ रही बाधाओं को समझने और संतुलित करने का माध्यम माना जाता है, ताकि साधक अपने कार्य और व्यक्तिगत जीवन में स्पष्ट दिशा के साथ आगे बढ़ सके।
✨ इन अंतिम तीन दिनों में महा यज्ञ, न्यास और ऊर्जा संतुलन विधियों के साथ कुल 1,00,008 मंत्र जप पूर्ण किया जाता है। यह संयुक्त साधना अधूरे कर्मों, मानसिक असंतुलन, आर्थिक दबाव और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को शांत करने की भावना से जुड़ी मानी जाती है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से भक्त गुप्त नवरात्रि के इन अंतिम तीन दिनों की साधना में भाग लेकर तमस, सत्व और रजस के संतुलन के साथ जीवन में स्थिरता, सजगता और नियंत्रण का अनुभव कर सकते हैं।