जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ बन जाती हैं जब बिना कारण विरोध बढ़ने लगता है, लोग पीठ पीछे षड्यंत्र रचते हैं, कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं और मन में असुरक्षा की भावना घर कर लेती है। कई बार व्यक्ति सही होते हुए भी स्वयं को कमजोर महसूस करने लगता है। ऐसे समय केवल प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि दिव्य संरक्षण और साहस की भी आवश्यकता होती है। सनातन परंपरा में माँ बगलामुखी और भगवान हनुमान की उपासना को ऐसी ही परिस्थितियों में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
दस महाविद्याओं में माँ बगलामुखी को आठवीं महाविद्या कहा गया है। उन्हें “शत्रु बुद्धि विनाशिनी” के नाम से जाना जाता है, अर्थात वह शक्ति जो विरोधियों की गलत सोच और हानिकारक इरादों को शांत कर देती है। मान्यता है कि उनकी कृपा से शत्रु की नकारात्मक योजना कमजोर पड़ने लगती है और जीवन में स्थिरता आने लगती है।
वहीं भगवान हनुमान को संकट मोचन, अद्भुत बल और अटूट साहस का प्रतीक माना जाता है। उनका स्मरण मात्र से भय कम होने और मन में आत्मविश्वास जागने की भावना जुड़ी है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होता है, तब बाहरी विरोध भी धीरे-धीरे प्रभावहीन होने लगता है।
मंगलवार का दिन विशेष रूप से भगवान हनुमान को समर्पित होता है और इसी दिन माँ बगलामुखी की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इसलिए चैत्र कृष्ण त्रयोदशी के इस शुभ मंगलवार को हरिद्वार स्थित माँ बगलामुखी धाम में माँ बगलामुखी शत्रु बुद्धि विनाशिनी यज्ञ एवं हनुमान शत्रुंजय पूजन का आयोजन किया जा रहा है।
🌸 माँ बगलामुखी और हनुमान जी की संयुक्त साधना का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब सुरक्षा और साहस दोनों की आवश्यकता हो, तब इन दोनों देव शक्तियों की संयुक्त उपासना विशेष मानी जाती है। माँ बगलामुखी शत्रु बाधाओं को शांत करने वाली शक्ति हैं, जबकि भगवान हनुमान कठिन परिस्थितियों में विजय और निर्भयता प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
माँ बगलामुखी शत्रु बुद्धि विनाशिनी यज्ञ उन भक्तों के लिए किया जाता है जो बार-बार विरोध, ईर्ष्या, कानूनी उलझन, कार्यस्थल पर प्रतिस्पर्धा या पारिवारिक विवादों का सामना कर रहे हैं। इस यज्ञ के माध्यम से माँ से प्रार्थना की जाती है कि शत्रु की नकारात्मक सोच शांत हो और जीवन में संतुलन स्थापित हो।
हनुमान शत्रुंजय पूजन भगवान हनुमान की शक्ति को जागृत करने का माध्यम माना जाता है। “शत्रुंजय” का अर्थ है – शत्रुओं पर विजय। इस पूजन से साहस, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ने की भावना जुड़ी होती है, जिससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना दृढ़ता से कर सके।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान में जुड़कर भक्त माँ बगलामुखी और भगवान हनुमान की कृपा से जीवन में सुरक्षा, साहस और विजय का आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना से जुड़ सकते हैं।