फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है, इसलिए इस समय किया गया जप-पाठ और यज्ञ मन, ऊर्जा और वातावरण पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जाता है। जब यह पावन तिथि मंगलवार के दिन आती है, तब यह और भी विशेष हो जाती है, क्योंकि यह दिन शक्ति, साहस और रक्षा से जुड़े देवताओं की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसी दिव्य संयोग में माँ बगलामुखी, काल भैरव और संकट मोचन हनुमान की संयुक्त सर्व कष्ट निवारण पूजा और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जो जीवन की बाधाओं से रक्षा की भावना से जुड़ा है।
जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब बिना किसी स्पष्ट कारण के विरोध बढ़ने लगता है, काम बनते-बनते रुक जाते हैं, मन में भय या अस्थिरता रहने लगती है और नकारात्मकता का प्रभाव महसूस होता है। ऐसी परिस्थितियों में सनातन परंपरा में रक्षक स्वरूप देवताओं की उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। पूर्णिमा की पूर्ण चंद्र ऊर्जा के साथ जब तीन शक्तिशाली देव स्वरूपों का सामूहिक स्मरण किया जाता है, तो इसे सुरक्षा, साहस और आंतरिक स्थिरता प्राप्त करने का दिव्य माध्यम माना जाता है।
तीन दिव्य रक्षक शक्तियों का संयुक्त आशीर्वाद:
🔸 माँ बगलामुखी – विरोधी शक्तियों को शांत कर जीवन में स्थिरता और विजय का आशीर्वाद देने वाली देवी मानी जाती हैं।
🔸 काल भैरव – समय, दिशा और सुरक्षा के अधिपति, जो भय और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करते हैं।
🔸 संकट मोचन हनुमान – साहस, आत्मविश्वास और हर प्रकार के कष्टों को दूर करने वाली दिव्य शक्ति के प्रतीक हैं।
इन तीनों देव शक्तियों की संयुक्त पूजा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि साधक को बाहरी बाधाओं से ही नहीं बल्कि अंदर के डर, भ्रम और अस्थिरता से भी शक्ति मिले। यज्ञ में दी जाने वाली आहुतियाँ जीवन की नकारात्मकता को छोड़कर सकारात्मकता को अपनाने का भाव दर्शाती हैं। मंत्रोच्चारण के साथ किया गया यह अनुष्ठान वातावरण को पवित्र और ऊर्जावान बनाता है, जिससे साधक को मानसिक शांति और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
मंगलवार का दिन हनुमान जी और भैरव उपासना के लिए अत्यंत प्रिय माना जाता है, वहीं पूर्णिमा की तिथि देवी आराधना के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिव्य संयोग में किया गया यह अनुष्ठान भक्तों को अपनी प्रार्थना को तीनों रक्षक शक्तियों के चरणों में समर्पित करने का अवसर देता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में शामिल होकर भक्त घर बैठे इस पावन अनुष्ठान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में साहस, सुरक्षा और सकारात्मक परिवर्तन की अनुभूति कर सकते हैं। यह केवल एक पूजा नहीं बल्कि वह आध्यात्मिक क्षण है, जहाँ श्रद्धा के साथ किया गया संकल्प व्यक्ति को आगे बढ़ने की नई शक्ति देता है।