लक्ष्मी जयंती माँ लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के समय फाल्गुन पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। यह दिव्य घटना सौभाग्य, समृद्धि और शुभता के प्रकट होने का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए यह दिन माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली माना जाता है।
इस वर्ष लक्ष्मी जयंती का पावन दिन वृंदावन और ब्रज में मनाई जाने वाली फूल होली के साथ आ रहा है। फूलों से खेली जाने वाली होली भक्ति, पवित्रता और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। जब लक्ष्मी जयंती और फूल होली का यह दिव्य संयोग बनता है, तब इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ जाती है। यह समय जीवन में धन, सफलता और सकारात्मक परिवर्तन के लिए विशेष माना जाता है।
इसी पावन अवसर पर मथुरा के प्राचीन दीर्घ विष्णु मंदिर में लक्ष्मी नारायण पूजा, केसर तिलक एवं फूल होली पुष्पांजलि अर्पण किया जाएगा। भगवान नारायण पालनकर्ता हैं, जो जीवन में स्थिरता और धर्मपूर्वक अर्जित धन की रक्षा करते हैं, वहीं माँ लक्ष्मी धन, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करती हैं। लक्ष्मी जयंती के दिन इन दोनों की संयुक्त पूजा आर्थिक बाधाओं को कम करने, करियर और व्यापार में उन्नति का मार्ग बनाने और जीवन में स्थिर समृद्धि लाने की भावना से की जाती है।
इस पूजा में केसर तिलक अर्पित किया जाता है, जो दिव्य ऊर्जा और धन आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। फूल होली पुष्पांजलि अर्पण भक्ति और कृतज्ञता का भाव प्रकट करता है, जिससे निरंतर उन्नति और सफलता की कामना की जाती है। जो साधक विशेष फल चाहते हैं, वे कमल अर्चना भी कर सकते हैं। कमल माँ लक्ष्मी का आसन माना जाता है और इसे अर्पित करना सर्वोच्च सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। लक्ष्मी जयंती के दिन कमल अर्पण करने से आर्थिक स्थिरता, व्यापार में विस्तार और धन से जुड़े कष्टों में कमी आने की भावना जुड़ी है।
इस लक्ष्मी जयंती फूल होली लक्ष्मी नारायण विशेष अनुष्ठान में सहभागी होकर साधक स्वयं को दिव्य सौभाग्य और समृद्धि की ऊर्जा से जोड़ते हैं। श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन पूजा में संकल्प जोड़कर आप भी लक्ष्मी नारायण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में धन, सफलता और उन्नति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। ✨