ज्योतिषशास्त्र के अनुसार केतु किसी भी व्यक्ति की कुंडली में एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है, जिसकी स्थिति के आधार पर किसी के जीवन में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही प्रभाव देखने को मिलते हैं। केतु की अगर गलत स्थिति में हो तो व्यक्ति में अक्सर पूर्ण वैराग्य, हानि, नासमझ और भ्रम जैसी भावना आती है। मूल नक्षत्र का स्वामी केतु ग्रह है। मान्यता है कि मूल नक्षत्र के दौरान केतु की पूजा करने से जीवन में चिंता, नकारात्मकता के अलावा चिंता एवं अवसाद को दूर करने में मदद मिलती है। दिनांक 26 मई 2024 को काशी के श्री बृहस्पति मंदिर में केतु ग्रह शांति विशेष 1008 केतु मूल मंत्र जाप एवं यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस मूल नक्षत्र विशेष पूजा में भाग लें और केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्त होकर सुखी जीवन का आशीष पाएं।