🙏 जब जीवन में बिना किसी स्पष्ट कारण के छिपी बाधाएँ शांति को ढकने लगती हैं, जब भय, विलंब या लगातार मन का बोझ बना रहता है, तब सनातन धर्म हमें दृश्य से परे देखने की शिक्षा देता है। ऐसी अवस्थाएँ अक्सर आंतरिक शक्ति के क्षीण होने या सूक्ष्म नकारात्मक प्रभावों से जुड़ी मानी जाती हैं। इन क्षणों में आत्मा स्वाभाविक रूप से एक उच्च संरक्षण की खोज करती है। माँ दुर्गा को वही परम शक्ति माना जाता है, जो अपने भक्तों और हर प्रकार के अंधकार, भय और अवरोध के बीच ढाल बनकर खड़ी रहती हैं।
🌺 आप भी महसूस कर सकते हैं गुप्त नवरात्रि अष्टमी की पावन शक्ति
गुप्त नवरात्रि बाहरी उत्सव का नहीं, बल्कि भीतर के परिवर्तन का काल माना जाता है। शास्त्रों में इसे वह समय कहा गया है जब देवी अपनी सूक्ष्म और प्रबल शक्तियाँ साधकों पर प्रकट करती हैं। इन नौ रात्रियों में अष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अष्टमी पर माँ दुर्गा अपने उग्र और करुणामय स्वरूप में प्रकट होकर गहन नकारात्मकता पर विजय की ऊर्जा प्रदान करती हैं।
📖 देवी माहात्म्य के अनुसार, जब महिषासुर का आतंक तीनों लोकों में फैल गया, तब सभी देवताओं की संयुक्त शक्ति से माँ दुर्गा प्रकट हुईं। उनकी विजय केवल असुर के अंत का प्रतीक नहीं थी, बल्कि संतुलन, संरक्षण और दैवी व्यवस्था की पुनः स्थापना का संकेत मानी जाती है। यही कथा अष्टमी उपासना का आध्यात्मिक आधार बनती है और यह स्मरण कराती है कि देवी की शक्ति से बड़ा कोई अवरोध नहीं होता।
🔥 नव चंडी हवन और देवी के नौ स्वरूपों का आह्वान से जुड़ें।
इस अनुष्ठान में किया जाने वाला नव चंडी हवन एक अत्यंत सम्मानित वैदिक कर्म माना जाता है। पवित्र मंत्रों और अग्नि में समर्पण के माध्यम से माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का आवाहन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह हवन वातावरण को शुद्ध करता है, असंतुलित ऊर्जाओं को शांत करता है और जीवन पथ में दिव्य संरक्षण की अनुभूति कराता है। इस महानुष्ठान का एक भावपूर्ण पक्ष 108 कन्या भोज है। जिसके अंतर्गत कन्याओं को नवदुर्गा का स्वरूप मानकर श्रद्धा से पूजन और भोजन कराया जाता है। यह कर्म करुणा, कृतज्ञता और समर्पण का भाव दर्शाता है, जिन्हें देवी कृपा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
🙏 कटरा तीर्थ में संपन्न यह गुप्त नवरात्रि अष्टमी अनुष्ठान, श्री मंदिर के माध्यम से भक्तों को माँ दुर्गा के चरणों में अपनी प्रार्थना अर्पित करने का अवसर देता है, इस मौके को जानें न दें। माँ आदिशक्ति की दिव्य ऊर्जा को महसूस करें।