क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे प्रयास करने के बाद भी परिवार में कुछ परेशानियां बार-बार क्यों बनी रहती हैं? घर में लगातार तनाव, महत्वपूर्ण कार्यों में देरी, आर्थिक अस्थिरता, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं या जीवन में भारीपन का अनुभव सनातन धर्म में कई बार पितृ दोष और पूर्वजों की अप्रसन्नता से जुड़ा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब पूर्वजों की इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं या उनके निमित्त आवश्यक कर्म पूरे नहीं हो पाते, तब उनके वंशजों के जीवन में बाधाएं और अशांति बनी रह सकती है। ऐसे समय में पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करना परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
अधिक मास की एकादशी से सोमवती अमावस्या तक का यह दुर्लभ समय पितृ शांति और पूर्वजों से जुड़े अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। अधिक मास स्वयं आध्यात्मिक साधना, कर्म शुद्धि और दिव्य कृपा प्राप्त करने का पवित्र समय माना जाता है, वहीं सोमवती अमावस्या पितरों को समर्पित पूजा और तर्पण के लिए विशेष महत्व रखती है। ऐसी मान्यता है कि इस दुर्लभ संयोग में किए गए मंत्र जाप, तर्पण, पूजा और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है और पितृ दोष के प्रभाव को शांत करने में सहायता मिलती है।
महाभारत में भी पितरों के सम्मान का महत्व कर्ण की कथा के माध्यम से बताया गया है। जब कर्ण देह त्यागकर स्वर्ग पहुंचे, तब उन्हें भोजन के स्थान पर सोना और रत्न प्राप्त हुए। कारण पूछने पर देवताओं ने बताया कि उन्होंने जीवनभर बहुत दान किया, लेकिन अपने पितरों को अन्न और जल अर्पित नहीं किया था। तब उन्हें पृथ्वी पर लौटकर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का अवसर दिया गया। तभी से पवित्र समय में पितृ कर्मों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी पवित्र भावना के साथ अधिक मास एकादशी से सोमवती अमावस्या तक काशी में 5 दिवसीय दैनिक पितृ दोष शांति महापूजा एवं गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है। इस अनुष्ठान की शुरुआत भक्त के नाम और गोत्र से संकल्प लेकर की जाएगी, जिसके बाद प्रतिदिन विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ पितृ शांति पूजा, तर्पण और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। यह पूजा पूर्वजों की शांति और संतुष्टि के लिए समर्पित मानी जाती है।
इन पांच पवित्र दिनों में प्रतिदिन दिव्य गंगा आरती भी की जाएगी। मान्यता है कि वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, मां गंगा की आरती और काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा पूर्वजों तक पहुंचकर उन्हें शांति प्रदान करती है। शास्त्रों के अनुसार, काशी जैसे पवित्र तीर्थ स्थल पर श्रद्धा से किए गए पितृ कर्म परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में सहायक माने जाते हैं।
यह दुर्लभ अधिक मास एकादशी से सोमवती अमावस्या का समय विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो पितृ दोष, पारिवारिक परेशानियों, बार-बार आने वाली बाधाओं और पूर्वजों से जुड़े कर्म प्रभावों से राहत चाहते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा से इस अनुष्ठान में भाग लेने से पितरों का आशीर्वाद मजबूत होता है और परिवार में स्थिरता, शांति और सुख का मार्ग प्रशस्त होता है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से आप भी काशी में आयोजित इस पवित्र 5 दिवसीय पितृ दोष शांति महापूजा एवं गंगा आरती में भाग लेकर पूर्वजों की शांति, पितरों के आशीर्वाद, पारिवारिक सुख-शांति और पितृ दोष से राहत के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।