🌸 क्या आपके बच्चे का जन्म कार्तिक महीने में हुआ है और आप उसकी सेहत, पढ़ाई या स्वभाव को लेकर मन ही मन चिंतित रहते हैं? कई माता-पिता ऐसा अनुभव करते हैं कि बच्चा जल्दी थक जाता है, बार-बार अस्वस्थ रहता है, पढ़ाई में मन नहीं लगा पाता या आत्मविश्वास में कमी महसूस करता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे कभी-कभी कार्तिक माह में जन्म से जुड़ा प्रभाव माना जाता है, जिसे कार्तिक दोष कहा जाता है। यह बच्चे की कोई गलती नहीं मानी जाती, बल्कि समय और ग्रहों के प्रभाव से जुड़ी एक धारणा मानी जाती है।
🌸 शास्त्रों और परंपराओं में भगवान श्री कार्तिकेय को बच्चों का रक्षक, साहस और अनुशासन का प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि षष्ठी तिथि, जिसे स्कंद षष्ठी भी कहा जाता है, भगवान श्री कार्तिकेय की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन की गई पूजा को माता-पिता अपने बच्चों के लिए सुरक्षा, संतुलन और सही दिशा की कामना के रूप में करते हैं। इसी के साथ भगवान श्री सूर्य को ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना बच्चे की सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय माना जाता है।
🌸 इस विशेष अनुष्ठान में भगवान श्री कार्तिकेय की उपासना के साथ कार्तिक दोष निवारण से जुड़ी पूजा और सूर्य अर्घ्य अर्पण किया जाता है। यह पूजा तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर में संपन्न की जाएगी, जिसे भगवान कार्तिकेय की आराधना से जुड़ा एक पवित्र स्थल माना जाता है। माता-पिता इस पूजा में सहभागिता करके अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक विकास की प्रार्थना करते हैं।
🌸 श्री मंदिर के माध्यम से आयोजित यह पूजा संतान के कल्याण की भावना के साथ जुड़ने का एक आध्यात्मिक अवसर मानी जाती है। यदि आप भी अपने बच्चे के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ यह साधना करना चाहते हैं, तो इस अवसर में सहभागिता कर सकते हैं।