मंदिरों का शहर कहा जाने वाला काशी, अपने आप में धार्मिक महत्व रखता है। यहां मौजूद प्राचीन 'काल भैरव मंदिर' को लेकर मान्यता है कि, यहां भगवान शिव अपने उग्र रूप काल भैरव के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार बाबा विश्वनाथ ने काल भैरव को काशी के कोतवाल के रूप में नियुक्त किया था। इनकी पूजा करने से भक्तों को अपार शक्ति एवं आत्मविश्वास का आशीष मिलता है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कालाष्टमी हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है क्यूंकि इस दिन बाबा कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी। शास्त्रों के अनुसार कालभैरव भगवान शिव का उग्र स्वरूप हैं जो समय के कालचक्र को नियंत्रित करते हैं। माना जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ कालाष्टमी के दिन इनकी पूजा करते हैं, बाबा कालभैरव उन्हें हमेशा जीवन में बाधाओं से बचाते हैं एवं शक्ति व आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। कालाष्टमी के दिन भैरव अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ शक्ति एवं आत्मविश्वास की प्राप्ति के लिए किया जाता है। साथ ही इसके पाठ से मनुष्य के आस पास नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव भी कम हो जाता है।