नकारात्मकता अचानक नहीं आती। यह धीरे-धीरे जमा होती है—घर के झगड़ों से, मन के दबाव से, बार-बार आने वाले भावनात्मक उतार-चढ़ाव से और उन आदतों से जिन्हें हम छोड़ना चाहते हैं लेकिन छोड़ नहीं पाते। समय के साथ यह जमा ऊर्जा घर की शांति, मन की साफ सोच और आगे बढ़ने की ताकत को प्रभावित करने लगती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसे अनुभव पूरे साल जमा हुई नकारात्मक ऊर्जा के संकेत होते हैं। जब यह नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, तो जीवन में रुकावट और बेचैनी महसूस होने लगती है। होलिका दहन को इस जमा बोझ को दूर करने का सबसे शक्तिशाली समय माना जाता है।
होलीका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद से जुड़ी हुई है। अपने ही परिवार में भय, विरोध और नकारात्मकता से घिरे होने के बावजूद प्रह्लाद अपनी अटूट भक्ति के कारण सुरक्षित रहे। जब होलिका ने उन्हें अग्नि में जलाकर नष्ट करने का प्रयास किया, तब उसका अपना अहंकार, नकारात्मक सोच और बुरा इरादा ही अग्नि में भस्म हो गया, जबकि प्रह्लाद को कोई नुकसान नहीं हुआ। यह घटना एक गहरे आध्यात्मिक सत्य को दर्शाती है- जब नकारात्मकता को सजग भाव से पवित्र अग्नि में समर्पित किया जाता है, तो वह स्वयं नष्ट हो जाती है। इसलिए होलिका दहन को संचित अंधकार को जलाकर जीवन में शुद्धता और सकारात्मकता वापस लाने का एक दुर्लभ और शुभ अवसर माना जाता है।
इस शक्ति को जागृत करने के लिए विशेष होलिका दहन पूजा की जाती है। इसमें ऐसे पवित्र तत्वों का उपयोग होता है जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने से जुड़े माने जाते हैं। गोमती चक्र और कौड़ी शंख को धार्मिक मान्यता में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और नकारात्मक प्रभाव कम करने वाला माना जाता है। इस दिन 1008 गोमती चक्र और 1008 कौड़ी शंख अग्नि में आहुति के रूप में अर्पित किए जाते हैं। यह बड़ी और अनुशासित आहुति जीवन की पुरानी नकारात्मक आदतों, मानसिक बोझ और अंदर छिपी रुकावटों को छोड़ने का प्रतीक है।
इसके साथ ही 21 किलो काले तिल भी अर्पित किए जाते हैं। काले तिल को परंपरा में नकारात्मक ऊर्जा को काबू करने और संतुलन लाने वाला माना गया है। यह शुद्धि से जुड़े अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण भाग है।
इस पूजा में नकरात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने के लिए एक विशेष प्रक्रिया भी होती है, जिसमें व्यक्ति अपने डर, बुरी आदतें या परेशानियों को लिखकर प्रतीक रूप में अग्नि को समर्पित करता है। जैसे-जैसे अग्नि प्रज्वलित होती है, वैसे-वैसे यह माना जाता है कि पूरे वर्ष की जमा नकारात्मकता दूर हो रही है और जीवन में शांति व सकारात्मकता के लिए नई जगह बन रही है।
श्री मंदिर द्वारा आयोजित यह विशेष होलिका दहन पूजा जीवन को मूल स्तर से शुद्ध करने के उद्देश्य से की जाती है। इसका भाव यह है कि साधक को संरक्षण, मानसिक हल्कापन और नए वर्ष की सकारात्मक शुरुआत का आशीर्वाद मिले।