हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे ज्ञान, वैराग्य और योग के संतुलित स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान दत्तात्रेय को देवतुल्य गुरु के रूप में भी स्मरण किया जाता है, जिनकी आराधना जीवन में सही दृष्टि, संतुलन और आंतरिक स्थिरता की भावना को प्रबल करती है। इसी गुरु तत्व की उपासना के लिए कुछ तिथियाँ विशेष मानी गई हैं, जिनमें माघ शुक्ल पूर्णिमा का स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। माघ शुक्ल पूर्णिमा को शास्त्रीय परंपरा में गुरु और पितृ तत्व के स्मरण का पावन समय माना गया है। कहते हैं कि इस तिथि पर की गई गुरु-समर्पित साधना और हवन मन को एकाग्र करने और जीवन की जटिलताओं पर शांत भाव से विचार करने की प्रेरणा देती है।
इसी कारण इस दिन भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी आराधनाएँ विशेष श्रद्धा के साथ की जाती हैं। इसी आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा गणगापुर क्षेत्र, कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में भिमा नदी के पावन तट पर स्थित है। इसे श्री क्षेत्र गणगापुर भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ श्री नरसिंह सरस्वती, जिन्हें गुरु दत्तात्रेय का द्वितीय अवतार माना जाता है, उन्होंने दीर्घकाल तक निवास किया था। इस कारण यह स्थान गुरु दत्त के उपासकों के लिए विशेष महत्व रखता है और यहाँ की साधनाओं को गहन आध्यात्मिक भाव से जोड़ा जाता है। गणगापुर क्षेत्र में स्थित भिमा–अमरजा संगम, कल्याण मठ और श्री गुरुपादुका स्थल को श्रद्धा और साधना का केंद्र माना जाता है। भक्तों की यह धारणा है कि यहाँ गुरु तत्व की उपस्थिति सूक्ष्म रूप से अनुभव की जा सकती है।
माघ शुक्ल पूर्णिमा पर यहाँ किया जाने वाला हवन विशेष रूप से गुरु और पितृ स्मरण की भावना के साथ संपन्न किया जाता है, जिससे साधक अपने कर्म, संस्कार और जीवन पथ पर आत्मचिंतन कर सके। माघ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर दक्षिण भारत के गणगापुर दत्त क्षेत्र में विद्वान पुरोहितों द्वारा गुरु-समर्पित हवन संपन्न किया जाएगा। ऐसी आराधनाएँ व्यक्ति को जीवन की परिस्थितियों को समझने, निर्णयों में स्पष्टता लाने और मानसिक स्थिरता को अनुभव करने का अवसर प्रदान करती हैं। यह साधना उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जाती है, जो जीवन में गुरु मार्गदर्शन की कमी या आंतरिक असंतुलन महसूस करते हैं।
🛕 नोट- यह आराधना गणगापुर के मुख्य मंदिर में नहीं, बल्कि क्षेत्र के भीतर विधिपूर्वक संपन्न की जाएगी।
श्री मंदिर के माध्यम से आप इस माघ शुक्ल पूर्णिमा पर होने वाले गुरु-समर्पित हवन में घर बैठे भाग ले सकते हैं और श्रद्धा और विश्वास के साथ इस अनुष्ठान से जुड़कर अपने जीवन पथ को संतुलन और स्पष्टता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।