वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि का आरंभ होता है। इस 9 दिन के पर्व में 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। वहीं यह पर्व दस महाविद्याओं की तंत्र साधना व तंत्र सिद्धि के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में बाबा भैरव एवं देवियों की तंत्र पूजा करवाना अत्यंत फलदायी माना गया है। तांत्रिक परंपराओं में बाबा भैरव एवं माँ बगलामुखी की पूजा को बेहद शक्तिशाली और महत्वपूर्ण बताया गया है। तंत्र मार्ग में भैरव बाबा को इष्ट देव कहा गया है और कहते हैं कि देवियों से मनचाहा वरदान पाने के लिए सर्वप्रथम बाबा भैरव की पूजा करना आवश्यक है। माँ बगलामुखी स्तंभन की अधिष्ठात्री हैं, मान्यता है कि इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है। देवी साधक की सभी आध्यात्मिक और भौतिक इच्छाएं पल में पूरी कर देती हैं।
ऐसा माना जाता है कि देवी बगलामुखी की दिव्य ऊर्जा का आह्वान करने से भक्तों के आसपास सुरक्षा कवच बनता है जो उनके रास्ते में आने वाले किसी भी नुकसान या खतरे को दूर कर सकता है। वहीं भैरवनाथ को आपत्तियों का विनाश करने वाला देवता कहा गया है। इनकी अराधना से भक्तों के आंतरिक एवं बाह्य स्तर पर मौजूद नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, इन दिनों देवी एवं भैरव की विशेष पूजा अर्चना करने से अखंड सुरक्षा के साथ सभी आध्यात्मिक और भौतिक इच्छाओं की पूर्ति का आशीष मिलता है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि के शुभारंभ होने पर देवी एवं भैरव संयुक्त पूजा का आयोजन किया जा रहा है, श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में अवश्य भाग लें।