✨ प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में माँ गौरी और भगवान शंकर की कृपा से पाएं सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद 💐🙏
कई बार जीवन में ऐसे हालात बनते हैं जब पारिवारिक रिश्तों में तनाव बढ़ने लगता है। पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर मतभेद हो जाते हैं, जिससे मन अशांत हो जाता है और घर का वातावरण भी प्रभावित होता है। धीरे-धीरे यह स्थिति परिवार की खुशी और आपसी समझ को कमजोर कर देती है। ऐसे समय में केवल आपसी प्रयास ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और ईश्वरीय कृपा भी सहारा देती है। हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना गया है। विश्वास है कि इन दोनों की संयुक्त उपासना से रिश्तों में संतुलन और एक-दूसरे के प्रति समझ बढ़ती है।
शास्त्रों में इन दोनों की संयुक्त आराधना के लिए विशेष रूप से प्रदोष काल को शुभ बताया गया है। यह हर माह की त्रयोदशी तिथि के संध्या काल को कहा जाता है। इसका समय सूर्यास्त से लगभग 72 मिनट (3 घड़ी) तक माना गया है। इस अवधि को बहुत शुभ और पवित्र समझा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत में नृत्य करते हैं और देवता उनकी स्तुति करते हैं। कहते है कि इस समय में की गई पूजा से मन को शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।
इसी संदर्भ में श्री मंदिर के माध्यम से गौरी-केदारेश्वर रुद्राभिषेक एवं गौरी श्रृंगार सेवा का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष अनुष्ठान काशी के प्राचीन गौरी-केदारेश्वर महादेव मंदिर में सम्पन्न होगा। यहाँ का शिवलिंग अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रतिष्ठित है, जो शिव और शक्ति की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक है। कहा जाता है कि माता गौरी ने इसी स्थान पर भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी, इसलिए यहाँ की पूजा वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सामंजस्य लाने वाली मानी जाती है।
इस अनुष्ठान में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा और माता गौरी का श्रृंगार अर्पित होगा। जल, दूध, दही, शहद, घी और पुष्पों से की गई पूजा का महत्व विशेष रूप से प्रदोष काल में और अधिक बढ़ जाता है। यह साधना व्यक्ति के भीतर श्रद्धा, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
📿 श्री मंदिर के माध्यम से होने वाले इस अनुष्ठान में जुड़कर श्रद्धालु अपने जीवन में पारिवारिक शांति और आपसी समझ को प्रबल बनाने का संकल्प ले सकते हैं।