🌺 गणेश जयंती के शुभ अवसर पर गणपति पूजा एवं गणेश अथर्वशीर्ष अभिषेक अत्यंत पुण्यदायी और फलदायक माने गए हैं। माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश जयंती भगवान गणपति के प्राकट्य का दिव्य पर्व है, जब विघ्नहर्ता स्वयं भक्तों के कष्ट हरने हेतु पूज्य होते हैं। इस दिन की गई विशेष गणेश पूजा जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं, विलंब और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में सहायक होती है।
गणपति अथर्वशीर्ष अभिषेक इस पूजा का सबसे शक्तिशाली अंग है। वैदिक मंत्रों से युक्त अथर्वशीर्ष पाठ के साथ जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से किया गया अभिषेक भगवान गणेश को शीघ्र प्रसन्न करता है। शास्त्रों में वर्णित है कि अथर्वशीर्ष स्वयं गणपति का स्वरूप है, जिसके श्रवण और जप मात्र से पाप क्षय, बुद्धि-विवेक की वृद्धि और कार्यसिद्धि प्राप्त होती है। गणेश जयंती पर किया गया यह अनुष्ठान विशेष रूप से शिक्षा, व्यापार, विवाह, संतान, स्वास्थ्य और नए कार्यों की शुरुआत में आने वाली अड़चनों को समाप्त करता है। पूजा के प्रभाव से साधक के जीवन में शुभ आरंभ, स्थिरता, समृद्धि और मानसिक शांति का संचार होता है। यह दिन गणपति कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।
🌿 डोडीताल गणेश मंदिर में गणपति अथर्वशीर्ष अभिषेक अत्यंत दुर्लभ और सिद्धिदायक माना जाता है। हिमालय की गोद में स्थित डोडीताल वह पावन स्थल है, जहां पुराणों के अनुसार, भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था, इसलिए यहां की गई उपासना का फल शीघ्र और गहन रूप से प्राप्त होता है। इस दिव्य मंदिर में किया गया गणपति अथर्वशीर्ष अभिषेक वैदिक ऊर्जा और प्राकृतिक तत्वों से युक्त होकर साधक के जीवन में विशेष परिवर्तन लाता है।
अथर्वशीर्ष मंत्र स्वयं गणपति का तात्त्विक स्वरूप है। जब इसके पाठ के साथ शुद्ध जल, दुग्ध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है, तो यह बुद्धि, विवेक और विघ्ननाश की शक्ति को सक्रिय करता है। डोडीताल की पवित्र वायु और शांत वातावरण इस साधना को और अधिक प्रभावशाली बना देता है। इस अभिषेक से कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं, मानसिक अशांति शांत होती है और भक्तों को नए आरंभ, सफलता तथा आंतरिक स्थिरता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्री मंदिर द्वारा आयोजित इस दिव्य साधना में भाग लेने का अवसर हाथ से न जाने दें!