🪔 जीवन के कुछ समय ऐसे आते हैं जब मन बेचैन रहता है, निर्णय लेने में भ्रम होता है, डर और मानसिक दबाव बढ़ जाता है या फिर प्रयास के बावजूद स्पष्टता नहीं मिलती। हिंदू मान्यता के अनुसार ऐसी स्थितियाँ अक्सर राहु के प्रभाव, विशेष रूप से राहु महादशा या अंतरदशा के दौरान देखी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि ऐसे ही छिपे संघर्षों के लिए मनाई जाती है, जब भक्त माँ दुर्गा से भीतर की शक्ति और जीवन में मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं।
🪔 गुप्त नवरात्रि के दौरान माघ शुक्ल अष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह देवी शक्ति और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी होती है। इस दिन राहु नक्षत्र शतभिषा प्रभाव में रहता है, जिस पर राहु का अधिकार माना जाता है। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार जब राहु अस्थिरता लाता है, तब दुर्गा सप्तशती पाठ से राहु का प्रभाव शांत होता है और मन में संतुलन आता है। गुप्त नवरात्रि और राहु नक्षत्र का यह दुर्लभ संयोग राहु शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🪔 दुर्गा सप्तशती में बताया गया है कि माँ दुर्गा ने नकारात्मक शक्तियों का नाश कर संसार में संतुलन स्थापित किया। राहु भ्रम और भय का प्रतीक है, जबकि माँ दुर्गा सत्य, सुरक्षा और साहस की देवी हैं। दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ राहु मंत्र जाप और चंडी हवन करने से राहु की अस्थिर ऊर्जा देवी की कृपा से संतुलित होती है। यह पूजा कटरा स्थित नव दुर्गा मंदिर में होती है, जो माँ दुर्गा की दिव्य उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध शक्ति स्थल माना जाता है। यहां पीढ़ियों से देवी की आराधना होती आ रही है।
🪔 यह पूजा गुप्त नवरात्रि, राहु नक्षत्र शतभिषा और माँ दुर्गा की सप्तशती शक्ति को एक साथ जोड़ती है। भक्त इस पूजा के माध्यम से मानसिक तनाव, भ्रम, भय और राहु से जुड़ी बाधाओं से राहत तथा जीवन में शांति, स्थिरता और स्पष्टता की कामना करते हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष पूजा आपके जीवन में मानसिक शांति, सुरक्षा और राहु शांति का आशीर्वाद लाने का माध्यम बनती है।