🌾 मकर संक्रांति हमारे जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ एक ऐसा पर्व माना जाता है, जो प्रकृति, परिश्रम और आशा को एक सूत्र में बांधता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं और धरती पर नई ऊर्जा का संचार धीरे धीरे शुरू हो जाता है। सर्दियों के बाद खेतों में फिर से हरियाली दिखाई देने लगती है और किसान के मन में भी आने वाले समय को लेकर नई उम्मीद जाग उठती है। मकर संक्रांति केवल एक तिथि नहीं मानी जाती, बल्कि यह उस विश्वास का प्रतीक है कि सच्चा परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
☀️ इस पावन दिन सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में सूर्य को जीवन का आधार माना गया है, जिनकी किरणों से धरती को उर्वर शक्ति प्राप्त होती है और फसलों का विकास संभव होता है। किसान भी अपने दिन की शुरुआत सूर्य के दर्शन से करता है और उन्हीं से आगे बढ़ने की प्रेरणा लेता है। साथ ही माता धन्य लक्ष्मी को अन्न और भंडार की देवी माना जाता है। मान्यता है कि जब घर और खेत में अन्न की प्रचुरता होती है, तभी जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है। सूर्यदेव और माता धन्य लक्ष्मी की संयुक्त पूजा परिश्रम और प्राप्ति के बीच संतुलन का भाव उत्पन्न करती है।
🌾 मकर संक्रांति पर की जाने वाली धन्य लक्ष्मी और सूर्य पूजा किसान के हृदय से जुड़ी हुई मानी जाती है। इस पूजा में धान, गेहूं, तिल और नए अन्न को समर्पित किया जाता है, जो पूरे वर्ष किए गए परिश्रम की याद दिलाते हैं। यह पूजा केवल एक धार्मिक विधि नहीं, बल्कि धरती, फसल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक भाव है। इसमें किसान अपनी चिंताएं, उम्मीदें और विश्वास पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित करता है।
🙏 इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यह विशेष पूजा जयपुर के प्रसिद्ध गलता जी मंदिर में आयोजित की जा रही है। यह स्थान अपनी शांति और दिव्य वातावरण के लिए जाना जाता है। श्री मंदिर के माध्यम से आप भी इस पावन अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं और मकर संक्रांति के इस शुभ दिन को श्रद्धा, भाव और नई उम्मीद के साथ मना सकते हैं।